मेरठ में दहेज प्रथा की टूटी कमर, खूब हो रही सराहना, जानें एक बेटी का पिता होना कितना मुश्किल?

मेरठ

मेरठ में दहेज प्रथा की कमर कैसे टूटी और आखिर क्या ऐसा हो गया कि खूब सराहना होने लगी? पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

लोगों का मानना है कि बेटी पराई धन होती है, लेकिन इस पराई धन को एक पिता जब अपने पसीने की धन से उसके जीवन साथी के लिए तौलता है तो वास्तव में उसके कलेजे सहम जाते हैं।
पहले तो पिता अपने उस बेटी को शिक्षा देने के साथ ही उसका लालन-पालन करता है। कभी कभी ऐसा भी होता है कि वही पिता अपने बिना खाए ही रह जाता है लेकिन अपने उस बेटी को बिना खाए नहीं सोने देता है। इतना सब करने के बावजूद भी जब उस बेटी की शादी का समय आता है तो उस पिता को अपनी बेटी देने के साथ-साथ मोटी रकम भी देनी पड़ती है, जो दहेज के नाम से प्रचलित है।

 

अब वह मजबूर पिता सोचता है कि बेटी के श्रृंगार की सामग्री के लिए धन इकट्ठा करे कि उसके दहेज के लिए मोटी रकम या फिर बारातियों के आदर-सत्कार की व्यवस्था के लिए पैसे इकट्ठा करे। इन सभी व्यवस्था में यदि किसी भी तरह की कमी हो गई तो शायद उस पिता की इज्जत नीलाम हो सकती है।
यदि खातिरदारी में कमी हुई तो अलग से कटाक्षों का सामना करना पड़ेगा और यदि दहेज में कोई कसर रह गई तो बेटी के लिए मुसीबतें बढ़ जायेंगी और जब बेटी की मुसीबतें बढ़ी तो कौन पिता चैन से रह सकता है?

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए मेरठ के एक सगाई कार्यक्रम में वर पक्ष के लोगों ने वधू पक्ष के लोगों द्वारा दहेज के रूप में दिए जा रहे पैसे को वापस लौटा कर वहां उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया।

वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवादाता के मुताबिक विक्रांत नाम के युवक को सगाई कार्यक्रम में वधू पक्ष की ओर से 7 लाख रुपए की रकम मिली। इस रकम में विक्रांत ने 1100 रुपए मिलाकर सगाई की चौकी पर रख दिया और लड़की के पिता से बोला कि आप मुझे अपनी बेटी दे रहे हैं यह हमारे लिए क्या कम है कि जो मैं यह रकम लूं?
लड़की के पिता विक्रम से हरगिज़ करने लगे तो विक्रम ने कहा कि अभी मुझे इसकी आवश्यकता नहीं है। जब मुझे इसकी आवश्यकता होगी तो मैं मांग लूंगा। विक्रम के इस विचार ने तो सबका मन मोह लिया।
यदि यही विचार सबके मन में जागृत हो जाए तो शायद हर वो पिता चैन की नींद सो सकेगा,जो रात-रात भर जागकर अपनी बेटी के शादी की कीमत के बारे में सोचकर पूरी रात बिता देता है।

इस विचार के संबंध में कुछ लोगों का मानना है कि यदि लोग दहेज के बदले बेटी कि डिग्रियां मांगें तो शायद हर बेटी शिक्षित हो सकेगी और जब लोगों के अन्दर शिक्षा का संचार हुआ तो वहीं से दहेज प्रथा का खण्डन होना सुनिश्चित हो जायेगा।

 

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