लखीमपुर खीरी कांड: अजय मिश्रा टेनी और आशीष मिश्रा को बड़ी राहत, गवाह को धमकाने के केस में नहीं चलेगा मुकदमा

लखीमपुर खीरी

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी खबर देश की सर्वोच्च अदालत से सामने आ रही है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी खबर देश की सर्वोच्च अदालत से सामने आ रही है। मुख्य मुकदमे के गवाह को डराने-धमकाने के मामले में पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्रा ‘मोनू’ को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट रूप से सूचित किया है कि इस मामले में दोनों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की विशेष पीठ के समक्ष इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए पीठ को बताया कि गवाह को बयान बदलने के लिए धमकाने के मामले की गहन जांच की गई है।

जांच के बाद पुलिस ने केवल एक आरोपी अमनदीप सिंह के खिलाफ ही कोर्ट में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की है। पुलिस ने साफ किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और उनके पुत्र आशीष मिश्रा के खिलाफ इस मामले में संलिप्तता के साक्ष्य नहीं मिले हैं, इसलिए उनके विरुद्ध अभियोजन की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत के सामने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने दलील देते हुए कहा, “गवाह को धमकाने वाली एफआईआर की जांच के बाद आई चार्जशीट में मेरा (आशीष मिश्रा) नाम तक शामिल नहीं है। इसके साथ ही, लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य मुकदमे की सुनवाई भी बहुत तेजी से चल रही है और अगले तीन महीनों के भीतर इसके पूरा होने की उम्मीद है।”

दरअसल, लखीमपुर कांड के मुख्य मुकदमों में से एक महत्वपूर्ण गवाह बलजिंदर सिंह ने आरोप लगाया था कि उन पर अदालत में बयान बदलने और गवाही से पीछे हटने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था और जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। स्थानीय पुलिस द्वारा इस पर एक्शन न लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।

शीर्ष अदालत के कड़े रुख के बाद यूपी पुलिस की एक विशेष टीम ने पंजाब के मुक्तसर जाकर गवाह बलजिंदर सिंह का विस्तृत बयान दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 195A (गवाह को झूठी गवाही के लिए धमकाना), धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी, जिसमें अब केवल अमनदीप सिंह पर ही शिकंजा कसा है।

64 गवाहों की गवाही अभी बाकी, अगले महीने होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की इस स्टेटस रिपोर्ट को आधिकारिक रिकॉर्ड पर ले लिया है। इसके साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष को पुलिस की इस रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह के भीतर एक जवाबी हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने की विशेष अनुमति प्रदान की है। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अभी भी 64 गवाहों की कोर्ट में गवाही दर्ज होना बाकी है। शीर्ष अदालत अब इस मामले पर अगले महीने दोबारा सुनवाई करेगी।

विदित हो कि 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन चल रहा था। आरोप है कि इसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा से जुड़ी थार जीप सहित अन्य गाड़ियों ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को पीछे से बेरहमी से कुचल दिया था। इस पूरे हिंसाक्रम में 4 किसानों और एक स्थानीय पत्रकार सहित कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाद में आशीष मिश्रा को सशर्त जमानत दे दी थी, लेकिन केस के स्पीडी ट्रायल और प्रगति पर नजर रखने के लिए इस मुख्य याचिका को अपने पास लंबित रखा है।

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