बुलंदशहर: राजघाट पर अमावस्या स्नान के दौरान गंगा में डूब रही बच्ची, जांबाज नाविक बालमुकुंद ने जान पर खेलकर बचाया

नरौरा/राजघाट

बुलंदशहर जनपद में आषाढ़ अमावस्या के पावन पर्व पर जहाँ एक ओर लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान में लीन थे, वहीं बुलंदशहर के प्रसिद्ध राजघाट गंगा तीर्थ पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद में आषाढ़ अमावस्या के पावन पर्व पर जहाँ एक ओर लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान में लीन थे, वहीं बुलंदशहर के प्रसिद्ध राजघाट गंगा तीर्थ पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ स्नान के दौरान तेज बहाव के कारण एक मासूम बच्ची गंगा नदी के गहरे पानी में डूबने लगी। घाट पर चीख-पुकार मचते ही एक जांबाज स्थानीय नाविक बालमुकुंद ने देवदूत बनकर अपनी जान जोखिम में डाली और उफनती नदी में छलांग लगा दी। नाविक के इस अदम्य साहस से बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक परिवार उजड़ने से बच गया।

स्नान के दौरान पैर फिसलने से तेज बहाव में बही मासूम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ जनपद के निवासी रिंकू अपनी पत्नी सोनम और अपनी लाडली बेटी के साथ आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर राजघाट गंगा तीर्थ पर आस्था की डुबकी लगाने आए थे। गंगा तट पर स्नान करते समय अचानक पानी के तेज बहाव और गहरे ढलान के कारण बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और वह नदी में डूबने लगी। अपनी आंखों के सामने बेटी को डूबता देख माता-पिता बदहवास हो गए और घाट पर भारी भीड़ के बीच चीख-पुकार मच गई।

बिना पल गंवाए नाविक ने लगाई छलांग, दी नई जिंदगी

घाट पर मौजूद नाविक बालमुकुंद ने जैसे ही बच्ची को डूबते और परिजनों को तड़पते देखा, उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत उफनती गंगा नदी में छलांग लगा दी। पानी के तेज करंट से मुकाबला करते हुए बालमुकुंद ने कुछ ही पलों में डूब रही बच्ची को मजबूती से पकड़ लिया और उसे सुरक्षित तैरते हुए तट पर बाहर निकाल लाए। घाट पर ही बच्ची को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गई। नाविक की त्वरित सूझबूझ और अदम्य साहस की बदौलत मासूम को एक नई जिंदगी मिल गई।

थाना प्रभारी और ग्राम प्रधान ने थपथपाई पीठ

नाविक बालमुकुंद के इस अत्यंत साहसिक और मानवीय कार्य की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में उनकी सराहना होने लगी। ग्राम प्रधान ओमवीर सिंह और नरौरा थाना प्रभारी निरीक्षक भुवनेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर जांबाज नाविक बालमुकुंद को इस बहादुरी के लिए बधाई दी और उनकी पीठ थपथपाई।

अपनी जिगर के टुकड़े को सकुशल और जीवित देख माता-पिता रिंकू और सोनम की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने रोते हुए नाविक बालमुकुंद के पैर पकड़ लिए और उनका कोटि-कोटि आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बालमुकुंद उनके परिवार के लिए साक्षात भगवान का रूप बनकर आए हैं। घाट पर मौजूद सैकड़ों अन्य श्रद्धालुओं और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बालमुकुंद की इस जांबाजी को सलाम किया।

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