बागपत: प्राकृतिक संसाधनों की लूट रुकी नहीं, तो हर नागरिक की पीठ पर होगा ऑक्सीजन सिलेंडर डॉ. मिथिलेश दांगी

बड़ौत

बागपत जनपद प्राकृतिक संसाधन हमारे भविष्य की असली पूंजी और निधि हैं।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

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बागपत जनपद प्राकृतिक संसाधन हमारे भविष्य की असली पूंजी और निधि हैं। यदि बहुराष्ट्रीय विदेशी कंपनियों द्वारा देश के जल, जंगल, जमीन और प्राणवायु का इसी रफ्तार से दोहन होता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी के हर नागरिक को अपनी पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घूमना पड़ेगा।” यह गंभीर चेतावनी आजादी बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. मिथिलेश कुमार दांगी ने दी। वे बड़ौत के चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल में चल रहे आवासीय संस्कार शिविर के तीसरे दिन ‘प्राकृतिक संसाधन और स्वदेशी’ विषय पर आयोजित बौद्धिक सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

क्रासर: आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत के संस्कार शिविर का तीसरा दिन; आर्य वीरों ने लिया लाठी का प्रशिक्षण, स्वदेशी से बचेगा देश
देश में बढ़ीं विदेशी कंपनियां, गांवों में रोजगार के बजाय बढ़ रही बेरोजगारी

झारखंड (हजारीबाग) से विशेष रूप से पधारे डॉ. मिथिलेश कुमार दांगी ने देश की वर्तमान आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिति के चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए

विदेशी कंपनियों का जाल: उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में भारत के भीतर महज 12,000 विदेशी कंपनियां काम कर रही थीं, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 1 लाख 10 हजार के पार पहुंच चुकी है। ये कंपनियां देश के प्राकृतिक संसाधनों को निचोड़ रही हैं।

स्वदेशी बनाम विदेशी का खेल: देश में कुल 29 लाख स्वदेशी कंपनियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 19 लाख सक्रिय हैं। भारत के 6 लाख गांवों के हिसाब से हर गांव में औसतन तीन सक्रिय स्वदेशी कंपनियां आती हैं। यदि पूंजी निवेश से ही विकास होता, तो आज गांवों की यह दुर्दशा न होती। आज बड़ी और विदेशी कंपनियां छोटी-छोटी चीजों के निर्माण (जीरो तकनीक) में घुस गई हैं, जिससे स्थानीय रोजगार छिन रहा है और देश का मुनाफा विदेशों में पलायन कर रहा है।

सड़कों के किनारे ‘सोलर ग्रिड’ बने, तो बच जाएगी किसानों की उपजाऊ जमीन

खनन परियोजनाओं से जल और प्राणवायु को हो रहे नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय संयोजक ने विकास के एक वैकल्पिक मॉडल का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि सड़क मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 65 लाख किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। यदि सरकार इन राष्ट्रीय व राज्यीय राजमार्गों के किनारों पर सोलर पैनल लगाकर ऊर्जा (बिजली) का निर्माण करे, तो देश के किसानों की एक इंच उपजाऊ जमीन भी बिजली परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित नहीं करनी पड़ेगी। इससे न केवल किसानों का विस्थापन रुकेगा, बल्कि खेती योग्य जमीन बची रहने से हमारा देश खाद्यान्न उत्पादन में हमेशा के लिए आत्मनिर्भर बना रहेगा।

इसरो की रिपोर्ट का हवाला: बंजर होने की कगार पर करोड़ों हेक्टेयर भूमि

बौद्धिक सत्र में जमीन के अंधाधुंध दोहन पर सचेत करते हुए डॉ. दांगी ने इसरो की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की लगभग 98 मिलियन हेक्टेयर उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर होने (मरुस्थलीकरण) की ओर बढ़ रही है, जो भविष्य के खाद्य संकट का बड़ा संकेत है।

इससे पूर्व, सुबह के सत्र में शिविर में भाग ले रहे आर्य वीरों को आत्मरक्षार्थ लाठी चलाने का कड़ा शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपना कौशल दिखाया।

आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत द्वारा आयोजित इस सात दिवसीय आवासीय शिविर के तीसरे दिन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ रखने और बच्चों का उत्साहवर्धन करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित लोग उपस्थित रहे।

शिविर अध्यक्ष धर्मपाल त्यागी एवं सभा मंत्री रवि शास्त्री।

मीरा वर्मा, कपिल आर्य, हरेंद्र आर्य और राजवीर त्यागी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता।

 

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