संभल: सरकारी जमीन पर बनी मजार पर चला प्रशासन का बुलडोजर; भारी फोर्स की मौजूदगी में 24 वर्गमीटर भूमि कब्जामुक्त, ठोका जुर्माना

गुन्नौर

सरकारी संपत्तियों और जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ सूबे में जारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत संभल जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

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सरकारी संपत्तियों और जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ सूबे में जारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत संभल जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। संभल जनपद के गुन्नौर तहसील क्षेत्र अंतर्गत बाघऊ गांव में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित एक मजार को शुक्रवार को भारी पुलिस व पीएसी बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की इस संयुक्त और कई घंटे चली कार्रवाई के बाद २४ वर्गमीटर सरकारी भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है।

क्रासर: बबराला के बाघऊ गांव में 70 पुलिसकर्मियों और पीएसी के साये में हुई कार्रवाई; जिलाधिकारी कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद गरजा बुलडोजर
गाटा संख्या592 की सरकारी भूमि पर हुआ था अवैध निर्माण

प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, बबराला थाना क्षेत्र के ग्राम बाघऊ में “खेरे वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार” के नाम पर पक्का निर्माण कराया गया था। राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में की गई सघन पैमाइश और जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि गाटा संख्या ५९२ की सरकारी भूमि के लगभग 24 वर्गमीटर क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्जा कर यह निर्माण खड़ा किया गया है।

5 वर्ष पूर्व हुआ था स्थायी निर्माण

राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, करीब पांच वर्ष पूर्व इस चिन्हित स्थान पर ज्यारत के नाम पर छोटा निर्माण शुरू हुआ था, जिसने धीरे-धीरे एक स्थायी और पक्के निर्माण का रूप ले लिया। ग्रामीणों की शिकायत पर जब जांच सही पाई गई, तो ग्राम सभा बाघऊ की ओर से 18 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2003 की धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय में बेदखली का वाद दायर किया गया।

तहसीलदार कोर्ट ने दिया था आदेश, डीएम कोर्ट ने भी खारिज की कब्जाधारी की अपील
तहसीलदार न्यायालय ने सभी पक्षों के बयानों और राजस्व साक्ष्यों का गहनता से परीक्षण करने के बाद मजार को अवैध अतिक्रमण मानते हुए उसे तत्काल ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। साथ ही कोर्ट ने मुख्य कब्जाधारी अजीज (पुत्र अल्लन, निवासी बाघऊ) पर ३९ हजार रुपये की क्षतिपूर्ति (जुर्माना) तथा ३०० रुपये निष्पादन शुल्क भी जमा करने का कड़ा दंड सुनाया था।

तहसीलदार कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कब्जाधारी अजीज ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर कर मजार को पुराना धार्मिक स्थल बताते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी न्यायालय ने भी गत 3 जून 2026 को कब्जाधारी की अपील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके बाद शुक्रवार को इस ध्वस्तीकरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।

सुरक्षा के रहे कड़े बंदोबस्त, 70 जवानों ने घेरा पूरा इलाका

मामले की धार्मिक संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था की स्थिति को भांपते हुए प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे। गुन्नौर एसडीएम विकास चंद्र और तहसीलदार रवि सोनकर के दिशा-निर्देश पर नायब तहसीलदार अनुज कुमार को इस पूरे ध्वस्तीकरण अभियान का प्रभारी बनाया गया।

कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए

थाना बबराला और थाना गुन्नौर की भारी पुलिस फोर्स मौके पर मुस्तैद रही।

सुरक्षा के लिहाज से पीएसी और पुलिस के करीब 70 जवानों ने पूरे प्रभावित क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर किलेबंदी कर रखी थी।

बिना किसी विरोध के कई घंटों की मशक्कत के बाद मजार के अवैध ऊंचे ढांचे और मुख्य गेट को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया।

मुतवल्ली ने जताया विरोध, कहा— 500 वर्ष पुरानी थी पीर बाबा की मजार’

दूसरी ओर, मजार के मुतवल्ली अजीज ने प्रशासनिक बुल्डोजर की इस कार्रवाई पर अपनी गहरी आपत्ति और दुख व्यक्त किया है। अजीज का दावा है कि यह मजार उनके पूर्वजों के समय से यानी करीब 500 से 600 वर्ष पुरानी है, जिससे आसपास के कई गांवों के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में माता रानी के मंदिर के साथ-साथ पीर बाबा की यह मजार हमेशा सामाजिक समरसता का केंद्र रही, लेकिन प्रशासन ने उनके शांतिपूर्ण सहयोग के बाद भी मजार के मुख्य द्वार को बेरहमी से तोड़ दिया।

कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है कार्रवाई, अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं — एसडीएम
एसडीएम गुन्नौर विकास चंद्र का आधिकारिक बयान:

इस पूरे मामले में कानून के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शी विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। राजस्व जांच में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि पूरी तरह सही पाई गई थी। तहसीलदार और जिलाधिकारी न्यायालय दोनों स्तरों पर कब्जाधारी को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन उनके दावे खारिज हो गए। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद ही शुक्रवार को इस अवैध निर्माण को हटाया गया है। भविष्य में भी सरकारी जमीनों को कब्जाने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

 

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