औरंगाबाद: बूढ़े बाबू मेले के मैदान की चारदीवारी निर्माण पर रोक; EO ने तीन सेवादारों को थमाया नोटिस, DM से मिलेंगे सेवादार

बुलंदशहर

बुलंदशहर जनपद के औरंगाबाद में प्राचीन नागेश्वर शिव मंदिर से सटे ऐतिहासिक ‘बूढ़े बाबू मेला’ मैदान की चारदीवारी के निर्माण कार्य पर नगर पंचायत प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद के औरंगाबाद में प्राचीन नागेश्वर शिव मंदिर से सटे ऐतिहासिक ‘बूढ़े बाबू मेला’ मैदान की चारदीवारी के निर्माण कार्य पर नगर पंचायत प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सेवाराम राजभर ने मंदिर से जुड़े तीन सेवादारों को आधिकारिक नोटिस तामील कराते हुए निर्माण कार्य बंद करने और मौके से निर्माण सामग्री हटाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

राजस्व अभिलेखों में ‘जलमग्न’ और ‘कब्रिस्तान’ दर्ज है भूमि

नगर पंचायत ईओ द्वारा सेवादार दीपक अग्रवाल, नितिन सिंघल और मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राजीव कौशल को जारी किए गए नोटिस के अनुसार, जिस गाटा संख्या 1146 पर चारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा था, वह भूमि सरकारी राजस्व अभिलेखों में ‘बच्चे दफनाने की भूमि’, ‘जलमग्न भूमि’ (पोखर) और ‘धोबी घाट’ (कपड़े धोने के स्थान) के रूप में दर्ज है।

अदालत में विचाराधीन है मामला, उल्लंघन पर ध्वस्तीकरण की चेतावनी

ईओ सेवाराम राजभर ने स्पष्ट किया कि उक्त विवादित भूमि का मामला इस समय फास्ट ट्रैक जूनियर डिवीजन-1, माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) और आयुक्त मेरठ के समक्ष विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त, अपर जिला जज बुलंदशहर (न्याय कक्ष संख्या-12) ने भी अपने पूर्व के फैसले में गाटा संख्या 1146 को पोखर तालाब मानते हुए नगर पंचायत औरंगाबाद के पक्ष में निर्णय दिया था।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य तुरंत नहीं रोका गया, तो इसे अवैध मानते हुए ध्वस्त (Demolish) कर दिया जाएगा और निर्माण सामग्री जब्त कर विधिक व वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

भूमाफियाओं पर आरोप, जिलाधिकारी से गुहार लगाएंगे सेवादार

दूसरी ओर, नोटिस मिलने के बाद तीनों सेवादारों ने नगर पंचायत प्रशासन के दावों को खारिज किया है। सेवादारों का कहना है कि उनके पास बूढ़े बाबू मेला मैदान की इस जमीन के सभी पुख्ता और वैध ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय भूमाफियाओं ने मेले की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर रखे हैं और वे ही इस धार्मिक व जनहित के निर्माण कार्य में रोड़े अटका रहे हैं।

सेवादारों के मुताबिक, उन्होंने पहले भी मंदिर और मेले की भूमि की आधिकारिक पैमाइश (नापजोख) के लिए तहसील प्रशासन को शिकायती पत्र दिया था, लेकिन प्रशासन ने अब तक पैमाइश नहीं कराई। सेवादारों ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही इस पूरे मामले को लेकर बुलंदशहर के जिलाधिकारी (DM) कुमार हर्ष से मुलाकात करेंगे और अपने दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखेंगे।

 

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