जौनपुर: शाही ईदगाह में अकीदत के साथ संपन्न हुई बकरीद की नमाज, इमाम ने बताया कुर्बानी का ऐतिहासिक महत्व

जौनपुर

जौनपुर जनपद के मछली शहर पड़ाव स्थित ऐतिहासिक शाही ईदगाह में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पावन पर्व पूरी अकीदत, सादगी और शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न हुआ।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर जनपद के मछली शहर पड़ाव स्थित ऐतिहासिक शाही ईदगाह में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पावन पर्व पूरी अकीदत, सादगी और शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न हुआ। इस मुकद्दस मौके पर शाही ईदगाह के इमाम एवं खतीब हज़रत मौलाना अब्दुज़ ज़ाहिर सिद्दीकी हन्फी ने हजारों अकीदतमंदों को ईद की विशेष नमाज अदा करवाई। नमाज के बाद बारगाहे-इलाही में मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे के लिए दुआएं मांगी गईं।

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है कुर्बानी का इतिहास

शाही ईदगाह के इमाम मौलाना अब्दुज़ ज़ाहिर सिद्दीकी ने अपने विशेष खुतबे में कुर्बानी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि

कुर्बानी की शुरुआत अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत हुई है।

अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम के जज्बे को आजमाने के लिए उनकी सबसे प्रिय चीज उनके बेटे हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी मांगी थी। हज़रत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म के आगे सिर झुका दिया, लेकिन जैसे ही उन्होंने बेटे की गर्दन पर छुरी चलानी चाही, अल्लाह ने उनके इस अदम्य समर्पण को कुबूल कर लिया।जिब्रील अलैहिस्सलाम के जरिए वहां स्वर्ग से एक दुम्बा भेज दिया गया और बेटे के स्थान पर उसकी कुर्बानी हुई। इसी महान समर्पण और त्याग की याद में पिछले पांच हजार साल से हर साल दुनिया भर में बकरीद मनाई जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सुन्नत के मुताबिक नमाज हमेशा खुले मैदान या ईदगाह में ही पढ़ी जानी चाहिए, जिससे समाज की एकजुटता और शानो-शौकत का इजहार हो सके।

प्रशासनिक निर्देशों का पूरी तरह पालन करते हुए कुर्बानी सार्वजनिक रास्तों या खुले स्थानों पर कतई न की जाए। कुर्बानी के बाद बचे हुए अवशेषों और गंदगी को खुले में फेंकने के बजाय गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबाएं या नगर पालिका की कचरा गाड़ियों को सौंपें।

सोशल मीडिया पर पाबंदी

किसी भी प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी न की जाए और न ही कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाएं, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।

त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए शासन की मंशा के अनुरूप सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। सभी प्रमुख प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सुबह से ही मौके पर डटे रहे। इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से नेयाज ताहिर शेखू, मोहम्मद शोएब अच्छू खान, ज़फ़र राजा, रियाजुल हक़, हाजी इमरान खान, मौलाना आफाक, अकरम मंसूरी सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और अकीदतमंद मौजूद रहे।

 

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