महराजगंज:ईद-उल-अजहा पर AIMIM ब्लॉक अध्यक्ष यूनुस खान की बड़ी अपील: कानून के दायरे में रहकर करें कुर्बानी, सोशल मीडिया पर न डालें फोटो

महराजगंज

त्याग, समर्पण और भाईचारे का प्रतीक ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पवित्र त्योहार इस वर्ष 28 मई से 30 मई तक पूरे देश में अकीदत और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

त्याग, समर्पण और भाईचारे का प्रतीक ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पवित्र त्योहार इस वर्ष 28 मई से 30 मई तक पूरे देश में अकीदत और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के ब्लॉक अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार यूनुस खान ने क्षेत्रवासियों से त्योहार को पूरी तरह अमन, शांति और सरकारी गाइडलाइंस के तहत मनाने की पुरजोर अपील की है।

कानून और इस्लाम के दायरे में हो कुर्बानी

पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यूनुस खान ने बताया कि ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार हमें इंसानियत और अमन का संदेश देता है। उन्होंने समुदाय के लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि कुर्बानी की रस्म को अदा करते समय भारतीय कानून और इस्लाम के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। शासन द्वारा जिन जानवरों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी कुर्बानी कतई न की जाए।

यूनुस खान ने त्योहार के दौरान व्यवस्था और स्वच्छता बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए हैं. कुर्बानी की रस्म को खुले स्थानों पर करने के बजाय किसी बंद या ओट वाली जगह पर ही संपन्न करें।कुर्बानी के बाद बचे अवशेषों को खुले में न फेंकें, बल्कि उन्हें किसी उचित और गहरे स्थान पर दफन करें ताकि किसी राहगीर या अन्य नागरिक को असुविधा न हो। कुर्बानी के खून को नालियों में बहने से रोकें और पम्पलेट व पानी की मदद से साफ-सफाई सुनिश्चित करें। किसी भी परिस्थिति में कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स आदि) पर वायरल न करें।

भावनाओं का सम्मान ही अच्छे नागरिक की पहचान

उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चे और अच्छे नागरिक की यह पहली पहचान है कि वह अपने त्योहारों को खुशी से मनाने के साथ-साथ दूसरे धर्मों और समुदायों की धार्मिक भावनाओं का भी उतना ही सम्मान करे।

यूनुस खान ने सभी से भावुक अपील की है कि ईद-उल-अजहा के इन तीन दिनों के दौरान आपसी सौहार्द, गंगा-जमुनी तहजीब और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन का पूरा सहयोग करें।

 

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