सिद्धार्थनगर में निजी अस्पताल की बड़ी लापरवाही: बिना जांच ऑपरेशन से नवजात की मौत, जच्चा की हालत गंभीर

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा तहसील क्षेत्र में संचालित ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ पर कथित लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की मौत का गंभीर आरोप लगा है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा तहसील क्षेत्र में संचालित ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ पर कथित लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की मौत का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को शिकायती पत्र देकर अस्पताल संचालक और कथित डॉक्टर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि बिना किसी जरूरी जांच के ऑपरेशन किए जाने के कारण बच्चे की जान चली गई, वहीं प्रसूता की हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार, इटवा थाना क्षेत्र की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी की संभावना न होने और सीजर ऑपरेशन की व्यवस्था उपलब्ध न होने की बात कही। इसके बाद परिजन महिला को नजदीक के ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ लेकर पहुंचे।

बिना अल्ट्रासाउंड और हार्टबीट जांचे किया ऑपरेशन

पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल के कथित डॉक्टर ने बिना किसी अल्ट्रासाउंड या बच्चे की धड़कन (हार्टबीट) की जांच किए ही आनन-फानन में महिला का ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों की हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बस्ती के लिए रेफर कर दिया। बस्ती पहुंचने पर डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया।

नाम बदलकर दोबारा शुरू हुआ सील अस्पताल, संचालक की डिग्री पर सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा आरोप अस्पताल संचालक राकेश यादव पर लगा है। परिजनों का दावा है कि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं है, फिर भी वह धड़ल्ले से ऑपरेशन जैसे जटिल कार्य कर रहा है। पीड़ितों ने यह भी खुलासा किया कि यह अस्पताल पहले “सेवा हॉस्पिटल” के नाम से संचालित था और लापरवाही के कारण सील किया जा चुका था। बाद में सांठगांठ कर इसका नाम बदलकर “जनता सेवा हॉस्पिटल” रख दिया गया और दोबारा अवैध संचालन शुरू कर दिया गया।

इस दुखद घटना के बाद पीड़ित सिद्धार्थ कुमार ने बताया

“अस्पताल में मौजूद हमारी माता जी लगातार बच्चे की धड़कन जांचने की मिन्नतें करती रहीं, लेकिन कथित डॉक्टरों ने एक न सुनी। बिना किसी जांच के पेट चीर दिया गया, जिससे बच्चे की मौत हो गई। हम दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई चाहते हैं।”

मामले पर बोले सीएमओ

इस पूरे प्रकरण पर जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रजत चौरसिया से संपर्क किया गया, तो उन्होंने जिले से बाहर होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने फोन पर आश्वासन दिया कि उनके वापस लौटते ही इस पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस घटना से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर कठघरे में है।

 

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