महराजगंज: वन्यजीवों से सतर्क रहने का संदेश लेकर गांव पहुंचे वनकर्मी, ग्रामीणों को सिखाए सुरक्षा के गुर

महराजगंज

महराजगंज जनपद मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में मंगलवार को दक्षिणी चौक रेंज के वनटांगिया गांवों में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। वनटांगिया 27, 28 और नर्सरी क्षेत्र में आयोजित गोष्ठी में वनकर्मियों ने ग्रामीणों को वन्यजीवों की गतिविधियों के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की विस्तृत जानकारी दी।

घबराएं नहीं, समझदारी और सतर्कता से काम लें: रेंजर ऋषभ नायक

गोष्ठी को संबोधित करते हुए वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) ऋषभ नायक ने ग्रामीणों से कहा कि जंगल से सटे इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसलिए वन्यजीवों को देखकर घबराने या हिंसक होने के बजाय समझदारी और सतर्कता से काम लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अपील की कि यदि गांव के आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दें, ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।

सुरक्षा के लिए वन विभाग ने जारी की गाइडलाइन

वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को जंगल और खेतों में काम करते समय सावधानियां बरतने की सलाह दी।

अकेले जाने से बचें: शाम और रात के समय अकेले खेतों या जंगल की ओर जाने से पूरी तरह परहेज करें।

समूह में निकलें: महिलाओं और बच्चों को हमेशा समूह (ग्रुप) में ही बाहर निकलने की सलाह दी गई।

शोर और टॉर्च का प्रयोग: खेतों में काम करते समय आपस में बातचीत या शोर करते रहें और रात में अनिवार्य रूप से अपने पास टॉर्च रखें।

ग्रामीणों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण: वन दारोगा

वन दारोगा नित्यानंद मौर्या ने कहा कि मानव-वन्यजीव टकराव को रोकने में ग्रामीणों की भूमिका सबसे अहम है। आपसी जागरूकता और सहयोग से ही ऐसी अनहोनी घटनाओं को टाला जा सकता है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए वन विभाग ने ग्रामीणों को हेल्पलाइन नंबर और स्थानीय कर्मचारियों के संपर्क सूत्र भी उपलब्ध कराए हैं।

गोष्ठी में ये लोग रहे उपस्थित

इस जागरूकता अभियान और गोष्ठी के दौरान मुख्य रूप से वन दारोगा राहुल कुमार, प्रदीप यादव, वनरक्षक वास्तु पांडेय, अमृता निषाद, डाकिया सोनई, डब्ल्यूटीआई के सदस्य और भारी संख्या में वनटांगिया इलाकों के ग्रामीण व संभ्रांत नागरिक मौजूद रहे।

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