सिद्धार्थनगर: मनरेगा में करीब 8 लाख का बड़ा फर्जीवाड़ा, ग्राम प्रधान और सचिव समेत 4 पर केस दर्ज करने के आदेश

डुमरियागंज

सिद्धार्थनगर जनपद के विकास खंड डुमरियागंज की ग्राम पंचायत देईपार में मनरेगा योजना के तहत किए गए कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के विकास खंड डुमरियागंज की ग्राम पंचायत देईपार में मनरेगा योजना के तहत किए गए कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मनरेगा लोकपाल की जांच में करीब 7.91 लाख रुपये की हेराफेरी की पुष्टि होने के बाद दोषियों से वसूली और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक ही कार्य, दो अलग आईडी: ऐसे हुआ खेल

देईपार निवासी जंगल प्रसाद उर्फ जगराम की शिकायत पर मनरेगा लोकपाल सुधीर पांडेय ने मामले की जांच की। जांच और सत्यापन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि भट्टा पोखरा की खुदाई और संतराम के बाग के सामने गड्ढा खुदाई का कार्य वास्तव में एक ही था। भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए इसे दो अलग-अलग आईडी पर दर्ज किया गया। इसके अलावा, नियमों को ताक पर रखकर 5 साल की अनिवार्य अवधि पूरी होने से पहले ही फर्जी आईडी बनाकर गड्डा खुदाई का कार्य कागजों पर दिखा दिया गया, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हुआ था।

दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति

लोकपाल की जांच के अनुसार, वर्तमान ग्राम प्रधान इंद्रावती, ग्राम पंचायत सचिव हरिशंकर सिंह, तकनीकी सहायक ओमप्रकाश और ग्राम रोजगार सेवक राजकुमार ने आपस में मिलीभगत कर कूट रचित दस्तावेज तैयार किए। इन लोगों ने कुल 7,91,328 रुपये की सरकारी धनराशि का गबन किया।

लोकपाल के सख्त निर्देश

गबन की गई पूरी धनराशि (7.91 लाख रुपये) की समानुपातिक वसूली ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक से कर तुरंत राजकीय कोष में जमा कराई जाए।

ग्रामीणों में आक्रोश

इस बड़े खुलासे के बाद देईपार गांव सहित पूरे विकास खंड में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के नाम पर आने वाला पैसा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जेबों में जा रहा है। लोगों ने शासन से मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए।

 

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