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शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. भुमेश त्यागी के मुताबिक, अत्यधिक मात्रा में मीठा खाने से उसे पचाने में लिवर को सबसे अहम भूमिका निभानी पड़ती है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. भुमेश त्यागी के मुताबिक, अत्यधिक मात्रा में मीठा खाने से उसे पचाने में लिवर को सबसे अहम भूमिका निभानी पड़ती है। टेबल शुगर, मीठी चीजों और शुगरी ड्रिंक्स में मुख्य रूप से ‘फ्रक्टोज’ पाया जाता है, जिसका अधिकांश हिस्सा सीधे लिवर में जाकर जमने लगता है। जब कोई व्यक्ति लगातार उच्च कैलोरी और मीठी चीजों का सेवन करता है, तो लिवर अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट और शुगर के एक हिस्से को फैट (वसा) में बदलने लगता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर मेटाबोलिक डिस्फंक्शन से जुड़े ‘स्टीटोटिक लिवर रोग’ का खतरा पैदा हो जाता है, जिसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था।
ज्यादा मीठा खाने से शरीर में क्या प्रक्रिया होती है?
जब हम मिठाई या मीठी चीजें खाते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट टूटकर ग्लूकोज और फ्रक्टोज में बदल जाता है और खून में मिल जाता है। ग्लूकोज का इस्तेमाल हमारा शरीर तुरंत ऊर्जा के लिए कर सकता है या बाद के लिए जमा कर सकता है। वहीं, फ्रक्टोज को मुख्य रूप से हमारा लिवर ही मेटाबोलाइज करता है।
लगातार अत्यधिक फ्रक्टोज और कैलोरी लेने से लिवर में ‘डी नोवो लिपोजेनेसिस’ नामक प्रक्रिया सक्रिय हो जाती है, जिससे फैटी एसिड का उत्पादन बढ़ने लगता है। इस फैट का एक हिस्सा लिवर की कोशिकाओं में इकट्ठा होने लगता है। हालांकि, एक दिन मीठा खाने से ऐसा नहीं होता, लेकिन यह लंबे समय की आदत लिवर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। खासकर जिन लोगों का वजन अधिक है, इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या है या टाइप 2 डायबिटीज है, उनके लिए यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
क्या चीनी के सेवन से लिवर में सूजन आती है?
लिवर में फैट जमा होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि लिवर में तुरंत सूजन या गंभीर क्षति हो गई है। MASLD एक ऐसी स्थिति है जिसमें शुरुआती चरण में बिना किसी सूजन या चोट के भी लिवर में फैट जमा हो सकता है।
हालांकि, कुछ मामलों में यह चयापचय संबंधी विकार बढ़कर ‘मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस’ (MASH) में बदल सकता है। इस स्थिति में लिवर में फैट के साथ-साथ गंभीर सूजन आने लगती है और लिवर की कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो लंबे समय में यह स्थिति फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ मामलों में गंभीर लिवर कैंसर का कारण भी बन सकती है।
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