ऐतिहासिक उपलब्धि: जौनपुर में 55 साल बाद पूरा हुआ चकबंदी का वनवास, 5 गांवों को मिली बड़ी राहत

जौनपुर

जौनपुर जनपद जौनपुर में दशकों से लंबित चकबंदी की जटिल प्रक्रिया आखिरकार संपन्न हो गई है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर जनपद जौनपुर में दशकों से लंबित चकबंदी की जटिल प्रक्रिया आखिरकार संपन्न हो गई है। जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र के नेतृत्व में चकबंदी विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए उन गांवों में प्रक्रिया पूर्ण कर ली है, जहाँ 1970 के दशक से यह कार्य अटका हुआ था। इस कदम से न केवल भूमि विवादों का अंत होगा, बल्कि किसानों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे।

इन गांवों में दशकों बाद खत्म हुआ इंतजार

प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिन प्रमुख गांवों को चकबंदी से मुक्त किया गया है, उनकी सूची और लंबित समय इस प्रकार है:

ग्राम पौहा: 55 वर्ष बाद (1970 में अधिसूचित)

ग्राम बेलछा: 46 वर्ष बाद (1979 में अधिसूचित)

ग्राम मैदासपट्टी: 46 वर्ष बाद (1980 में अधिसूचित)

ग्राम सिहौली: 43 वर्ष बाद (1983 में अधिसूचित)

ग्राम कैलावर: 31 वर्ष बाद (1995 में अधिसूचित)

डेढ़ साल में चकबंदी: एक मिसाल

जहाँ कुछ गांवों में दशकों लगे वहीं जिलाधिकारी ने ग्राम हरिबल्लभपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि यहाँ मात्र डेढ़ वर्ष के भीतर चकबंदी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। इसे विभाग की कार्यक्षमता में सुधार की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण से प्रभावित ग्राम पाली और सुरीश देहाती में भी समस्याओं का समाधान कर प्रक्रिया पूरी की गई है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन का परिणाम

जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के समन्वय को दिया है। उन्होंने कहा:

यह उपलब्धि प्रमुख सचिव (राजस्व) और चेयरमैन, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के दिशा-निर्देशों तथा टीम के अथक परिश्रम का परिणाम है। सतत समीक्षा और पारदर्शिता के कारण वर्षों से लंबित मामलों का निस्तारण संभव हो सका।

जनता को मिलेगी बड़ी राहत

चकबंदी पूर्ण होने से किसानों को उनकी जमीन का सुव्यवस्थित स्वामित्व प्राप्त होगा। चकरोड, नालियों और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का निर्धारण होने से अब खेती-किसानी आसान होगी। जिलाधिकारी ने इस कार्य में सहयोग के लिए राजस्व कर्मियों के साथ-साथ बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का भी आभार व्यक्त किया है।

इस निर्णय से जौनपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी का माहौल है, क्योंकि अब किसान अपनी भूमि का बिना किसी कानूनी विवाद के विकास कार्यों में उपयोग कर सकेंगे।

 

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