महराजगंज : इंसाफ़ के लिए सड़क पर उतरना ही अंतिम उपाय? ठूठीबारी में केदार गौड़ की मौत पर उठा तीख़ा सवाल

महराजगंज

महराजगंज जनपद के ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत लोहरौली में बीते दिन, शुक्रवार की शाम लापरवाही के कारण एक अनियंत्रित कार ने केदार गौड़ (55) को रौंद दिया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत लोहरौली में बीते दिन, शुक्रवार की शाम लापरवाही के कारण एक अनियंत्रित कार ने केदार गौड़ (55) को रौंद दिया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। परिजनों ने आरोप‌ लगाया है कि आरोपी, केदार को रौंदने के बाद शव को जंगल में फेंकने के फिराक में था, लेकिन जैसे-तैसे मामला पुलिस तक पहुंचा और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आज शनिवार को केदार का शव पोस्टमार्टम से घर आया तो परिजनों ने सड़क पर शव को रखकर न्याय के लिए जमकर हंगामा किया।
पुलिस के कार्यवाही की रवैया और आरोपी की तीखी बातों ने पीड़ित परिजनों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया।
घटनाक्रम की सूचना मिलते ही मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक,निचलौल एसडीएम, सीओ, ठूठीबारी पुलिस,चौक थाने की पुलिस, निचलौल कोतवाली की पुलिस समेत संबंधित अधिकारियों का जमावड़ा लग गया और पीड़ित परिजनों को आश्वासन का हवाला दे दिया गया है।

अब सवाल यह है कि न्याय की कीमत इतनी बढ़ गई है कि पाने के लिए सड़क पर उतरना पड़े?

क्या सड़क पर ही उतरने से न्याय मिलेगा?
विगत कुछ दिनों पहले एक मामला नौतनवा थाना क्षेत्र के अड्डा बाजार से सामने आया था। एक युवक का शव अज्ञात कारणों से मिला था। परिजन एवं ग्रामीणों का मानना था कि सोची-समझी साजिश द्वारा युवक को मौत के घाट उतार दिया गया है। लेकिन पुलिस उक्त मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही थी। आखिरकार पीड़ित परिजन शव को लेकर सड़क पर इंसाफ के लिए उतर गएं और मौके पर तमाम आला अधिकारी पहुंचे।

एक तरफ पुलिस शान्ति व्यवस्था कायम रखने की बात करती है वहीं, दूसरी तरफ गंभीर मामलों में परिजनों को इंसाफ के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर करती है।
अब सवाल तो यही उठता है कि क्या वास्तव में न्याय अब सड़कों पर ही मिलेगा?

 

फिलहाल केदार गौड़ घटनाक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक और एसडीएम ने परिजनों को अस्वस्थ किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी। देखने वाली बात रहेगी कि क्या प्रशासन अपने बयानों पर खरा उतरती है या फिर यह भी मामला केवल फाइलों तक ही सिमटा रहेगा?

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