दृढ़ संकल्प की जीत: कमजोर दृष्टि भी नहीं रोक सकी पारस का रास्ता, यूपीएससी में 937वीं रैंक लाकर बुलंदशहर का मान बढ़ाया

बुलंदशहर

बुलंदशहर कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों तो शारीरिक बाधाएं भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। जनपद के सिकंदराबाद क्षेत्र के काजीवाड़ा निवासी पारस भाटिया ने इस कहावत को सच कर दिखाया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


बुलंदशहर कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों तो शारीरिक बाधाएं भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। जनपद के सिकंदराबाद क्षेत्र के काजीवाड़ा निवासी पारस भाटिया ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों में पारस ने 937वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है।

चुनौतियों को बनाया सीढ़ी

पारस भाटिया की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि वे कमजोर दृष्टि (Low Vision) की चुनौती से जूझ रहे थे। पढ़ाई के दौरान उन्हें अक्षरों को देखने में काफी कठिनाई होती थी, लेकिन उन्होंने विशेष लेंस का सहारा लिया और दिन-रात एक कर दी। उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि दिव्यांगता केवल शरीर में होती है, प्रतिभा में नहीं।

पहले भी लहरा चुके हैं सफलता का परचम

पारस की प्रतिभा का सफर यहीं से शुरू नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2022 में उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वर्तमान में वे जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। एक सरकारी पद की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी जारी रखी और अब यूपीएससी में भी सफलता का झंडा गाड़ दिया।

व्यापारी परिवार में खुशी का माहौल

एक साधारण व्यापारी परिवार से आने वाले पारस की सफलता की खबर मिलते ही सिकंदराबाद के काजीवाड़ा स्थित उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। पिता सतीश भाटिया और परिजनों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया।

युवाओं को संदेश: “मजबूत इरादे ही सफलता की कुंजी”

अपनी सफलता पर पारस भाटिया ने कहा कि निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण ही एकमात्र मंत्र है। उन्होंने युवाओं से कहा कि संसाधनों की कमी या शारीरिक चुनौतियां कभी आपकी हार का कारण नहीं बननी चाहिए।

 

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