अटल जयंती विशेष: जब एक पाकिस्तानी महिला ने माँगा कश्मीर, तो अटल जी ने माँग लिया पूरा पाकिस्तान!

ब्यूरो रिपोर्ट

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि शब्दों के जादूगर और हाजिरजवाबी के शिखर पुरुष थेपूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि शब्दों के जादूगर और हाजिरजवाबी के शिखर पुरुष थे। उनकी 101वीं जन्म जयंती पर देश आज उन्हें याद कर रहा है, तो उनकी वाकपटुता का वह मशहूर किस्सा फिर से चर्चा में है, जिसने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी थी।

वह किस्सा जो इतिहास बन गया

कहा जाता है कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पाकिस्तानी महिला पत्रकार ने अटल जी के अविवाहित होने पर चुटकी लेते हुए एक शर्त रखी। महिला ने कहा— “अटल जी, मैं आपसे शादी करने के लिए तैयार हूँ, लेकिन बदले में मुझे मुँह दिखाई (गिफ्ट) में ‘कश्मीर’ चाहिए।”

अटल जी, जो अपनी त्वरित बुद्धि के लिए जाने जाते थे, उन्होंने एक पल की भी देरी किए बिना मंद मुस्कान के साथ उत्तर दिया— “मैं भी आपसे विवाह के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरी भी एक शर्त है… मुझे ‘दहेज’ में पूरा पाकिस्तान चाहिए।”

अटल जी के इस जवाब ने न केवल उस महिला पत्रकार को खामोश कर दिया, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दे दिया कि भारत की संप्रभुता और कश्मीर पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

राजनीति के ध्रुव तारे

अटल जी का व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके विरोधी भी उनके मुरीद थे। 1994 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने विपक्ष में होने के बावजूद अटल जी को जेनेवा में भारत का पक्ष रखने के लिए भेजा, तो दुनिया हैरान थी। यह अटल जी की राष्ट्रभक्ति ही थी जिसने उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर ‘अजातशत्रु’ बना दिया।

कोटि-कोटि नमन

आज उनकी जन्म जयंती पर पूरा देश भारत माँ के इस महान सपूत को नमन कर रहा है। ‘पोखरण’ की शक्ति, ‘कारगिल’ का विजय संकल्प और ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ का आधुनिक विजन देने वाले अटल जी आज भी भारतीय राजनीति के आकाश में ध्रुव तारे की तरह चमक रहे हैं।

“हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ।” — अटल बिहारी वाजपेयी

 

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