पिपरहवा अवशेषों की वापसी और सिद्धार्थनगर में स्थापना का मुद्दा लोकसभा में उठा

सिद्धार्थनगर

नई दिल्ली वरिष्ठ भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने आज लोकसभा में नियम 377 के तहत पिपरहवा अवशेषों को उनके मूल स्थल कपिलवस्तु संग्रहालय, सिद्धार्थनगर में स्थापित करने का अनुरोध किया।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


नई दिल्ली वरिष्ठ भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने आज लोकसभा में नियम 377 के तहत पिपरहवा अवशेषों को उनके मूल स्थल कपिलवस्तु संग्रहालय, सिद्धार्थनगर में स्थापित करने का अनुरोध किया।

पाल ने भारत सरकार द्वारा इन अवशेषों की वापसी के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि सिद्धार्थनगर के पिपरहवा क्षेत्र में 1898 में खोजे गए ये पावन अवशेष करोड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पूजनीय हैं।

उन्होंने मई 2025 की घटना का उल्लेख किया, जब ये अवशेष हांगकांग की Sotheby’s नीलामी सूची में शामिल किए गए थे। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के त्वरित हस्तक्षेप से नीलामी रुकवाकर अवशेषों को सम्मानपूर्वक भारत वापस लाया गया था।

सांसद पाल ने कहा कि अवशेषों को भूटान में प्रदर्शनी के लिए भेजना भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का उदाहरण है। उन्होंने आग्रह किया कि इन पवित्र अवशेषों को सिद्धार्थनगर में पुनः स्थापित किया जाए, जिससे स्थानीय पर्यटन और बौद्ध परिपथ को नया प्रोत्साहन मिलेगा और सिद्धार्थनगर वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर अपना योग्य स्थान प्राप्त करेगा।

 

 

 

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