सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जनपद में अपनी ऐतिहासिक और सुगंधित पहचान को समेटे हुए, ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना में शामिल काला नमक चावल अब न सिर्फ जिले की पहचान है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

सिद्धार्थनगर जनपद में अपनी ऐतिहासिक और सुगंधित पहचान को समेटे हुए, ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना में शामिल काला नमक चावल अब न सिर्फ जिले की पहचान है, बल्कि यह यहां का ब्रांड एम्बेसडर बन चुका है। गैर-जनपद या अन्य प्रांतों के परिचितों को अच्छा तोहफा देने की बात आती है, तो स्थानीय लोग गर्व से सबसे पहले इसी सुगंधित चावल को भेंट करते हैं।
ODOP सम्मेलन से बढ़ेगा उत्पादन और निर्यात
वर्तमान में, इस अनमोल फसल के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। इसी क्रम में, आठ और नौ नवंबर को दो दिवसीय काला नमक चावल (बुद्धा राइस) क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
काला नमक की खेती करने वाले किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों का मानना है कि इस तरह के सम्मेलन से उन्हें एक बड़ा और संगठित बाजार मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी।
बौद्धकालीन कहानी: बुद्ध ने दिया था ‘महाप्रसाद’
काला नमक चावल की कहानी केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इतिहास और आस्था से जुड़ी है।
जनश्रुति के अनुसार
बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद जब महात्मा बुद्ध अपने शाक्य गणराज्य (कपिलवस्तु) लौट रहे थे, तो वह रास्ते में जिले के मौजूदा बजहा गांव में रुके थे।
वहां उन्होंने गांव के कुछ किसानों को अपनी झोली से मुट्ठी-मुट्ठी भर धान दिया और कहा, “इसे खेतों में लगाएं, इसकी खुशबू हमेशा हमारी याद दिलाती रहेगी।”
इसके बाद से ही यहां काला नमक धान की खेती का सिलसिला शुरू हुआ और इस सुगंधित चावल को ‘बुद्ध का महाप्रसाद’ नाम मिला।
आज, यह बौद्धकालीन काला नमक चावल, सिद्धार्थनगर की मिट्टी की खुशबू को विभिन्न देशों में बिखेर रहा है और जिले को विश्व पटल पर गौरवान्वित कर रहा है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) November 7, 2025





















