भारत नेपाल सीमा पर स्थित गोपालपुर (नेपाल) :मकर संक्रांति की तैयारियां अपने चरम सीमा पर।

महराजगंज

गोपालपुर (नेपाल) ठूठीबारी बॉर्डर से सटे स्थित श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर हर साल जो मेला लगता है, पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट 

गोपालपुर (नेपाल) ठूठीबारी बॉर्डर से सटे स्थित श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर हर साल जो मेला लगता है, वह एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है। इस मेले में आस-पास के विभिन्न गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं, और मेला क्षेत्र में चहल-पहल का माहौल होता है। मकर संक्रांति के दिन से पहले ही श्रद्धालु मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आना शुरू कर देते हैं, और चढ़ावा चढ़ाने का सिलसिला ब्रह्म मुहूर्त से प्रारंभ हो जाता है, जो सात दिन तक चलता रहता है।

यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि यहां विभिन्न प्रकार की दुकानें, झूले, खेल, और अन्य मनोरंजन के साधन भी लगाए जाते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आनंद का एक बड़ा साधन होते हैं। इस दौरान मेला स्थल पर नेपाल पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी रहती है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।

श्रद्धालु मुख्यतः नेपाल और भारत के सीमा क्षेत्र के गांवों से आते हैं, जैसे राजाबारी, ठूठीबारी, सड़कहवा, मरचहवां, पजड़फोड़वा, धरमौली, रामनगर, किशुनपुर, और भरवालिया हरपुर, पाल्ही, कुसुमा, बिलासपुर । इन गांवों के लोग मेला का हिस्सा बनकर धार्मिक अनुष्ठान में सम्मिलित होते हैं और श्रद्धा के साथ गुरु गोरक्षनाथ जी की पूजा करते हैं।

यह मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के लिए एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी होता है, जिसमें लोग एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं और अपनी परंपराओं को साझा करते हैं।

 

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