महराजगंज : ग्राम सभा धानी में ट्यूबवेल में स्टार्टर न होने से किसान त्रस्त, जिम्मेदार मौन

Voice Of News 24 

19 Sep 2024 15:43 PM

धानी (महराजगंज) 

महराजगंज जिले के ग्राम सभा धानी में किसानों के त्रस्त होने की पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जिला लगातार सुर्खियों में बना रहता है,यह कहने में संकोच बिल्कुल नहीं है। कभी जिम्मेदारो की लापरवाही, तो कभी कागजातों में विकास दिखाकर हकीकत छिपाने के मामले लगातार जनपद में आते रहते हैं। कुछ इसी प्रकार से आज एक और जिम्मेदारो के लापरवाही का मामला सामने आया है। विकासखण्ड धानी के ग्रामीण इलाकों में फसल सूखने के कागार पर है, लेकिन पानी के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

दरअसल ग्राम सभा धानी में ट्यूबवेल का सुविधा बकायदा किया गया है, उसके लिए गृह भी बनाया गया है। ट्यूबवेल तो गृह में हैं लेकिन उसकी स्थिति जर्जर पड़ी हुई है।
वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 संवाददाता को किसानों ने बताया कि इस ट्यूबवेल का स्टार्टर पिछले कई दिनों से नहीं लगा है, जिससे इस कड़ाके की धूप के साथ-साथ हम लोगों की चिंताएं भी बढ़ती चली जा रही है। किसानों का कहना है कि हम लोग ट्यूबवेल को लगवाने के लिए जिम्मेदारो से गुहार लगाते हैं लेकिन जिम्मेदार गुहार सुनने के बजाय आनाकानी करते हैं।

बाद में जब बार-बार शिकायत करने पर कुछ जिम्मेदार वहां पहुंचे और दो दिनों तक लगाएं बाद में ट्यूबवेल के स्टार्टर को खोल कर ले गये है। किसानों ने पूछा कहां ले जा रहे हैं आप लोग इसे, तो उन्होंने बताया कि किसी दूसरे ट्यूबवेल में लगाना है, वहां अधिकारी जांच करने आ रहे हैं।
ट्यूबवेल का स्टार्टर ले गए जिम्मेदारो को करीब एक सप्ताह बीत गया है लेकिन ले जाने के एक सप्ताह बाद भी ट्यूबवेल का स्टार्टर जिम्मेदारो द्वारा वहां नहीं लगाया गया है।

वहीं वरिष्ठ किसान शिवशंकर दूबे ने संवाददाता को बताया कि जब से इस ट्यूबवेल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है तब से शायद ही कोई किसान इस सुविधा का लाभ उठा पाया हों, उनका कहना है कि जब फ़सल सूखता है और ट्यूबवेल की जरूरत होती है तो यह खराब हो जाता है, तमाम दिक्कते आ जाती है, तथा जब-तक जिम्मेदार इसको बनवाते हैं या उपलब्ध कराते हैं तब-तक फसल या तो सूख गई होती है, या फिर लोग किसी तरह उसमें पानी की पूर्ति कर लेते हैं, जिससे तब-तक वह फसल तैयार हो चुकी होती है।
वरिष्ठ किसान ने बताया कि यदि तत्काल ट्यूबवेल को चलने और पानी देने योग्य नहीं बनाया गया तो लगभग 300 से 350 हेक्टेयर भूमि सूखे की जद में आ सकती है, और फसल बर्बाद हो सकती है, जिससे उन गरीब एवं असहाय किसानों को खानें के लिए अन्न की भी मात झेलनी पड़ेगी।

अब सोचने वाली बात यह है कि आखिर अधिकारी जांच करने क्या आते हैं, जब उन्हीं के आंड में जिम्मेदार फेर-बदल कर उनको चकमा दे देते हैं। मिली जानकारी अनुसार एक ही स्टार्टर के भरोसे कई ट्यूबवेल चलाया जाता है। इसमें लापरवाही किसकी मानी जाए, या तो जिम्मेदार घोटाला कर स्टार्टर के पैसे से अपनी जेब भर लिए हो, या फिर उच्चाधिकारियों द्वारा निचले स्तर के जिम्मेदारो को सभी ट्यूबवेल के लिए अलग-अलग स्टार्टर को उपलब्ध न कराया गया हो।

 

समस्या यहीं खत्म नहीं होती है, जब वाॅयस ऑफ न्यूज 24 के संवाददाता ने ट्यूबवेल रखें गए स्थान पर जाकर जमीनी हकीकत दिखाना चाहा तो बड़ी घांस-फूस एवं झाड़ियां देखकर हैरत में पड़ गए। ट्यूबवेल गृह तक जाने से पहले बड़े घांस-फूस व झाड़ियों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में यह भय बना रहता है कि कोई विषैला जीव उस झाड़ी में न बैठा हो, जिससे लोगों को क्षतिग्रस्त कर दें।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब किसानों की चिंता होगी दूर? फसलों को सूखने से बचाने के लिए किसानों को कब मुहैय्या कराई जायेगी सुदृढ़ सुविधाएं, जिससे किसानों की फसलें सूखकर क्षतिग्रस्त होने से बच सकें।

 

 

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