महाभारत काल से पूजी जाती है लेहड़ा देवी माता,UP के इस ज़िले में स्थापित है इनका मंदिर,जानिये अतीत की कहानी!

Voice Of News 24

15 Oct 2023 14:35PM

पूरे देश मे आज नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है,नवदुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं का सुबह से तांता दर्शन करने को लगा हुआ है, ऐसे में लोग लेहड़ा वाली माता के दरवार में जाकर मन्नत मांगने भारी संख्या में पहुँच रहें हैं, जानिए माता के इतिहास से जुड़े अतीत के किस्से…

महाराजगंज

महराजगंज में बसी मां लेहड़ा देवी की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। नवरात्रि के अवसर पर हर रोज यहां भक्तों की भारी भीड़ जुट रही है। जनपद के साथ ही आसपास के जिले के श्रद्धालु भी मंदिर में माता का आशीर्वाद लेने को उत्सुक हैं।उत्तर प्रदेश महराजगंज जिले में स्थित लेहड़ा देवी मंदिर का ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। महाभारत काल में पांडवों ने इस क्षेत्र में वक्त गुजारा था। फरेंदा-बृजमनगंज मार्ग पर आद्रवन जंगल के पास यह मंदिर है। मंदिर के बगल में बहने वाले प्राचीन पवह नाला का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां मौजूद देवी की पिडी पर माथा टेकने वालों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। अगल-बगल के जनपदों के साथ ही पड़ोसी राज्य बिहार व मित्र राष्ट्र नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा के साथ शीश नवाते हैं।

सदियों पुराना है लेहड़ा देवी का मंदिर,चौकठ पर पहुँचने वाले हर किसी की पूरी होती है मुराद

लेहड़ा देवी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। जनश्रुतियों व किवदंतियों के अनुसार मंदिर के आस पास पहले घना जंगल हुआ करता था। जंगल में ही मनोरम सरोवर के किनारे माता की पिडी स्थापित हुई थी। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय यहीं व्यतीत किया था। इसी सरोवर के किनारे युधिष्ठिर ने यक्ष के प्रश्नों का जवाब देकर अपने भाइयों की जान बचाई थी। इस मंदिर की स्थापना द्रौपदी के साथ पांडवों ने की थी। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इस मंदिर का उल्लेख अपने भारत यात्रा वृतांत में किया है।

माता के दरबार में निरंतर जलती है अखंड ज्योति,दर्शन और माथा टेकने पर भर जाती है खाली झोली

मुख्य मंदिर के बगल में ही पौहारी बाबा का प्राचीन मठ है। यहां 24 घंटे अखंड ज्योति जलती रहती है। नवरात्र व प्रत्येक मंगलवार को लोग यहां से भभूत (राख) ले जाते हैं। साथ ही मंदिर से प्रसाद के रूप में नारियल, चुनरी, लावा भी घर ले जाते हैं।

लेहड़ा मंदिर पहुँचने का ऐसा डगर,मन मे श्रद्धा और आस्था से पूरा होता है कामनाओं का सफर

आप उत्तर प्रदेश के आनंदनगर रेलवे स्टेशन से फरेंदा बृजमनगंज मार्ग पर स्थित इस मंदिर तक जाने के लिए रेल व सड़क मार्ग की सुविधा है। रेल से लेहड़ा रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग तीन किलोमीटर है। वहीं आनंदनगर से लगभग आठ किलोमीटर है। सड़क मार्ग से जाने के लिए आनंदनगर (फरेंदा) कस्बे के दीवानी कचहरी स्थित टैक्सी स्टैंड से जीप,आटो व बस की सुविधा उपलब्ध है।जिसके मदद से आप माँ के दरबार में जाकर दर्शन करके हाजिरी लगा सकते हैं।

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