गाजियाबाद

भारतीय किसान यूनियन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश चौधरी के नेतृत्व में बुधवार को गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

भारतीय किसान यूनियन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश चौधरी के नेतृत्व में बुधवार को गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में बागपत सहित कई अन्य क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने गन्ना मूल्य वृद्धि, बिजली विभाग की अनियमितताओं और परिवहन विभाग की कार्रवाई से जुड़ी प्रमुख समस्याएं प्रमुखता से उठाईं।
प्रमुख मांगें और मुद्दे
गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग
भाकियू संघर्ष मोर्चा के बागपत जिलाध्यक्ष अर्जुन प्रधान ने कहा कि जब चीनी का भाव लगभग 40 रुपये प्रति किलो था, तब गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल तय था। वर्तमान में चीनी का भाव बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके अनुपात में किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से गन्ने का भाव तुरंत बढ़ाने की मांग की।
बिजली व्यवस्था में सुधार
किसानों ने बिजली मीटरों में गड़बड़ी और अत्यधिक बिल आने से हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया। वक्ताओं ने मांग की कि किसानों और मजदूरों को बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली के भार (किलोवाट) में की गई बढ़ोतरी को तत्काल प्रभाव से ठीक किया जाए।
पुराने वाहनों पर कार्रवाई का विरोध
महापंचायत के दौरान भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र मुखिया ने परिवहन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क किनारे खड़े पुराने वाहनों को उठाकर उन पर मनमाने तरीके से कार्रवाई की जा रही है। कई वाहनों की बाजार कीमत 25 से 30 हजार रुपये के आसपास है, जबकि उन्हें हटाने के बाद केवल चार हजार रुपये की रसीद दिए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने प्रशासन से किसानों और वाहन स्वामियों को राहत देने की मांग की।
प्रशासन का पक्ष
परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर एआरटीओ बागपत विपिन कुमार ने स्पष्ट किया कि 10 से 15 वर्ष पुराने वाहनों के खिलाफ यह कार्रवाई माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। नियमों के तहत ही सभी पुराने वाहनों पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
महापंचायत के अंत में किसानों ने समस्याओं के शीघ्र और संतोषजनक समाधान की मांग करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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