सिद्धार्थ नगर
सिद्धार्थ नगर समाजवादी पार्टी के मजबूत विपक्ष होने के बावजूद मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जौहर यूनिवर्सिटी’ के अस्तित्व पर मंडराते संकट को लेकर अब सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर आवाजें बुलंद होने लगी हैं।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थ नगर समाजवादी पार्टी के मजबूत विपक्ष होने के बावजूद मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जौहर यूनिवर्सिटी’ के अस्तित्व पर मंडराते संकट को लेकर अब सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर आवाजें बुलंद होने लगी हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सीधे सवाल उठाए जा रहे हैं।
सवाल संख्या का नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति का है ।
इस महत्वपूर्ण विषय पर बात करते हुए बुद्धिजीवियों और समर्थकों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के पास वर्तमान में 111 विधायक और 37 सांसद हैं। यदि यह विशाल और मजबूत कुनबा सचमुच ठान ले, तो जौहर यूनिवर्सिटी को आज भी उजड़ने से बचाया जा सकता है। यह लड़ाई केवल आंकड़ों या संख्या बल की नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव से अपील: ‘सड़क से सदन तक लड़नी होगी निर्णायक लड़ाई’ ।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से सीधे तौर पर अपील करते हुए कहा जा रहा है कि अगर इतने मजबूत और ऐतिहासिक विपक्ष के रहते हुए भी जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए कोई प्रभावी और निर्णायक कदम नहीं उठाया गया, तो जनता के बीच बेहद गलत संदेश जाएगा।
इससे यह संदेश स्थापित होगा कि विपक्ष अपनी बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह असफल रहा है। ऐसे में स्वाभाविक है कि भविष्य में मुस्लिम समाज और अन्य शोषित वर्ग नए राजनीतिक विकल्पों की ओर रुख करने पर विचार करने के लिए मजबूर होंगे।
“जौहर यूनिवर्सिटी केवल ईंट और पत्थरों से बनी कोई साधारण इमारत नहीं है। यह उच्च शिक्षा, वर्षों के कड़े संघर्ष और एक बड़े सपने का प्रतीक है।”
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब किसी बड़े शिक्षा संस्थान पर संकट आता है, तो विपक्ष का काम केवल सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया या औपचारिक ट्वीट करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए सड़क से लेकर सदन तक, और अदालत से लेकर जनता की अदालत तक, हर उपलब्ध लोकतांत्रिक व संवैधानिक माध्यम का उपयोग करके पुरजोर आवाज उठानी होगी।
“एसी कमरों से बाहर निकलकर संघर्ष करने का समय”
अब वह समय बीत चुका है जब सिर्फ ट्विटर, प्रेस कॉन्फ्रेंस या बयानों के जरिए राजनीति की जाए। आज समय की मांग है कि नेता एसी कमरों से बाहर निकलें और धरातल पर जनता के बीच खड़े होकर संघर्ष करें। इतिहास हमेशा उन्हीं योद्धाओं को याद रखता है जो कठिन और विपरीत परिस्थितियों में डटकर मुकाबला करते हैं, न कि उन्हें जो केवल बयानबाजी कर इतिश्री कर लेते हैं।
रामपुर के सांसद की सक्रियता पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में रामपुर के वर्तमान सांसद की भूमिका पर भी तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं। जनता पूछ रही है कि
जो नेता हर मंच पर लोकतंत्र, संविधान और जनहित के लिए संघर्ष करने के बड़े-बड़े दावे करते थे, वे आज इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर खामोश क्यों हैं?
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर उनकी जमीनी सक्रियता आखिर दिखाई क्यों नहीं दे रही?
रामपुर की जनता और पूरे उत्तर प्रदेश को आज इस उदासीनता का उत्तर चाहिए। यह मामला अब किसी एक व्यक्ति विशेष का नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, मजबूत लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों की जनता के प्रति जवाबदेही का सबसे बड़ा प्रश्न बन चुका है। आज जो इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, कल इतिहास उनसे भी कड़े सवाल जरूर पूछेगा!
धन उगाही के लिए बन गए “कलमकार”? UP गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत पत्रकार शिवम पाण्डेय के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई शुरू pic.twitter.com/EtpilWYwWb
— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 16, 2026













