बुलंदशहर: ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत पुलिस को बड़ी कामयाबी, 2019 के हत्यारोपी फारुख को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

बुलंदशहर

बुलंदशहर पुलिस को जघन्य अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर पुलिस को जघन्य अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। वर्ष 2019 के एक बेहद चर्चित हत्याकांड के आरोपी फारुख को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 25,000 रुपये के आर्थिक दंड की कड़ी सजा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला जनपद की मॉनीटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष द्वारा कोर्ट में की गई बेहद प्रभावी और मजबूत पैरवी के बाद आया है।

यह संवेदनशील मामला खुर्जा नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। वर्ष 2019 में बुर्ज उस्मान निवासी वकील के भाई नसीर की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस वारदात का सीधा आरोप फारुख, पुत्र कालू पर लगा था। घटना के संबंध में पीड़ित परिवार की तहरीर पर 22 जून 2019 को खुर्जा नगर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।

हत्याकांड के बाद पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए वारदात के महज चार दिन बाद, यानी 26 जून 2019 को आरोपी फारुख को हत्या में इस्तेमाल किए गए अवैध तमंचे और कारतूस के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग से मामला दर्ज किया गया था। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए 10 सितंबर 2019 को ही न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।

‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत कोर्ट में हुई मजबूत पैरवी

मामले की गंभीरता को देखते हुए बुलंदशहर पुलिस ने इसे “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत चिह्नित किया था। मॉनीटरिंग सेल ने मामले को प्राथमिकता पर रखते हुए कोर्ट में सभी प्रमुख गवाहों की समय पर गवाही कराई और वैज्ञानिक साक्ष्यों व सबूतों को बेहद पुख्ता तरीके से प्रस्तुत किया।

नतीजतन, सोमवार (13 जुलाई 2026) को न्यायालय एडीजे-06 (ADJ-06) बुलंदशहर के न्यायाधीश संजय कुमार यादव ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी फारुख को हत्या का मुख्य दोषी पाया। कोर्ट ने उसे उम्रकैद और ₹25,000 के जुर्माने की सजा से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

इस जघन्य मामले में अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाने और पीड़ित परिवार को 7 साल बाद न्याय दिलाने में अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक (DGC) वीरपाल सिंह, मॉनीटरिंग सेल के प्रभारी निरीक्षक पंकज राय, पैरोकार कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल ललित कुमार की भूमिका बेहद सराहनीय और प्रमुख रही।

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