जौनपुरल: राग जौनपुरी पर परिचर्चा: अजय कुमार का पूरा लेखन एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन था , प्रो. अवधेश प्रधान

जौनपुर

हिंदी भवन एवं जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में दिवंगत विख्यात कवि, लेखक, चित्रकार और अनुवादक अजय कुमार की पावन स्मृति में ‘राग जौनपुरी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

हिंदी भवन एवं जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में दिवंगत विख्यात कवि, लेखक, चित्रकार और अनुवादक अजय कुमार की पावन स्मृति में ‘राग जौनपुरी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। दो सत्रों में संपन्न हुए इस गरिमामयी कार्यक्रम में अजय कुमार की बहुचर्चित पुस्तक ‘राग जौनपुरी’ पर गहन परिचर्चा की गई, जिसके बाद एक शानदार कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक साहित्यिक समागम में उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आए दिग्गज साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और कवियों का हुजूम उमड़ पड़ा।

‘राग जौनपुरी’ केवल पुस्तक नहीं, लोकसंस्कृति का जीवंत दस्तावेज
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अवधेश प्रधान ने अजय कुमार के अवदान को रेखांकित करते हुए कहा, “अजय कुमार का पूरा लेखन वास्तव में एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन है।” उन्होंने आगे कहा कि ‘राग जौनपुरी’ महज एक किताब नहीं है, बल्कि यह जौनपुर के जनजीवन, यहाँ की समृद्ध लोकसंस्कृति, इतिहास, संगीत और सामाजिक चेतना का एक जीवंत व ऐतिहासिक दस्तावेज है।

आम जनमानस और साझी विरासत का अनूठा प्रयास
वरिष्ठ पत्रकार एवं अनुवादक प्रभात कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक आम जनता की दृष्टि से शहर के ताने-बाने को देखने-समझने का एक अनूठा और ईमानदार प्रयास है। वहीं, वाराणसी से आए प्रख्यात लेखक वी.के. सिंह ने अजय कुमार को एक प्रखर जनपक्षधर साहित्यकार बताया, जिनका पूरा जीवन साधारण लोगों के संघर्षों और उनकी संस्कृति को समर्पित रहा।

आईपीएस अधिकारी एवं लेखक अमित श्रीवास्तव ने कहा कि अजय कुमार के लेखन में जौनपुर की साझी संस्कृति, साहित्यिक विरासत और लोकभाषा का जीवंत स्वरूप पूरी गहराई के साथ उभरकर सामने आता है। दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं इतिहासकार कनिका सिंह ने ‘राग जौनपुरी’ को ऐतिहासिक तथ्यों, लोकतांत्रिक दृष्टि और आलोचनात्मक विवेक से समृद्ध एक बेजोड़ कृति करार दिया।

वरिष्ठ विचारकों और आलोचकों ने दी श्रद्धांजलि

परिचर्चा के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रणय कृष्ण, बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप, वरिष्ठ कवि कौशल किशोर, वरिष्ठ शायर अहमद निसार तथा युवा आलोचक आलोक श्रीवास्तव ने भी पुस्तक की बारीकियों और अजय कुमार के अमूल्य साहित्यिक योगदान पर अपने गंभीर विचार साझा किए। प्रथम सत्र का कुशल संचालन के.के. पांडेय ने किया।

कवि सम्मेलन और मुशायरे से सजी महफिल

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और स्वयं जौनपुर जनपद से आए नामचीन कवियों एवं शायरों ने अपनी बेहतरीन रचनाओं, काव्य-पाठ और मुशायरे के माध्यम से स्वर्गीय अजय कुमार को भावभीनी काव्यात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की। देर तक चली इस महफिल का शानदार संचालन वरिष्ठ कवि धीरेन्द्र पटेल ने किया।

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