निघासन: सुहेली नहर मार्ग की बदहाली ने खोली विकास दावों की पोल, गड्ढों में तब्दील सड़क से 20 से अधिक गांवों का संपर्क टूटा

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लखीमपुर खीरी जनपद के निघासन विकास खंड क्षेत्र से ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ाती एक गंभीर रिपोर्ट सामने आ रही है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

लखीमपुर खीरी जनपद के निघासन विकास खंड क्षेत्र से ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ाती एक गंभीर रिपोर्ट सामने आ रही है। ग्राम पंचायत बौधिया कला से सुहेली नहर बैराज नाले के किनारे होकर गुजरने वाली मुख्य डामर सड़क इस समय पूरी तरह से जर्जर होकर तबाही का मंजर बयां कर रही है। गड्ढों, उखड़ी गिट्टियों और कीचड़ से लथपथ इस मार्ग पर आवागमन करना अब लोगों के लिए अपनी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

20 से अधिक गांवों की ‘लाइफलाइन’ पर डामर का नामोनिशान मिटा
जानकारी के अनुसार, पलिया-निघासन मुख्य मार्ग से निकलकर सुहेली नहर के पास से विभिन्न ग्रामीण अंचलों को जोड़ने वाली यह सड़क पूरे क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’ मानी जाती है। इस मुख्य मार्ग से खैरीगढ़, बौधिया कला, उधौनगर,सिसैया, पचपेड़ा, रिछैया, रमुआपुर

समेत 20 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों का तहसील और जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क होता है। लेकिन वर्तमान में इस सड़क से डामर का नामोनिशान पूरी तरह मिट चुका है। जगह-जगह गहरे और जानलेवा गड्ढे बन गए हैं, पैचवर्क की गिट्टियां उखड़कर सड़क पर बिखर चुकी हैं और जलभराव के कारण पूरा मार्ग किसी दलदली तालाब में तब्दील हो गया है।

हादसों का सबब बना मार्ग, गांवों तक नहीं पहुंच पा रही एंबुलेंस

बारिश के इस मौसम में यहाँ की स्थिति और भी खौफनाक हो गई है। सड़क पर हुए भयंकर जलभराव और फिसलन के कारण दोपहिया, चारपहिया वाहनों की बात तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो गया है। स्कूली छात्र-छात्राओं, गंभीर मरीजों और विशेषकर गर्भवती महिलाओं को हर दिन इसी नारकीय मार्ग से गुजरना पड़ रहा है, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। बदहाली का आलम यह है कि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस भी गांवों के भीतर तक नहीं पहुंच पाती है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। किसानों को भी अपनी तैयार फसल मंडी तक ले जाने में भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

वर्षों से सिर्फ खोखले वादे सुन रहे ग्रामीणों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी सिर्फ चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही जनता को उनके हाल पर तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सुहेली नहर मार्ग की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य शीघ्र शुरू नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

अब देखना यह है कि क्या अधिकारियों का यह आश्वासन कभी जमीन पर उतरता भी है, या फिर इन दर्जनों गांवों के हजारों लोग इसी तरह बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता के आंसू रोते रहेंगे।

 

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