बिधूना (औरैया)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई ई-रजिस्ट्री पंजीकरण प्रक्रिया के विरोध में अब वकीलों ने भी मोर्चा खोल दिया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई ई-रजिस्ट्री पंजीकरण प्रक्रिया के विरोध में अब वकीलों ने भी मोर्चा खोल दिया है। तहसील बार एसोसिएशन बिधूना (जनपद औरैया) की शनिवार को एक आकस्मिक आम सभा आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर आगामी 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक पांच दिवसीय पूर्ण ‘कलमबंद हड़ताल’ पर जाने का बड़ा निर्णय लिया गया है। इस दौरान अधिवक्ता सभी प्रकार के न्यायिक और तहसील संबंधी कार्यों से पूरी तरह विरत रहेंगे।
महानिरीक्षक निबंधक के आदेश पर जताई गंभीर आपत्ति
बार एसोसिएशन के सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश के महानिरीक्षक निबंधक (लखनऊ) द्वारा जारी पत्रांक संख्या 2523/2026 (दिनांक 04.06.2026) के माध्यम से प्रदेश भर में लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।
आम सभा में मौजूद अधिवक्ताओं ने इस नई व्यवस्था को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। वक्ताओं ने दो टूक कहा:
महानिरीक्षक निबंधक द्वारा थोपी जा रही ई-रजिस्ट्री पंजीकरण प्रक्रिया न केवल अधिवक्ताओं के व्यावसायिक हितों के खिलाफ है, बल्कि यह आम जनमानस (जमीन खरीदारों व विक्रेताओं) के लिए भी बेहद जटिल और नुकसानदेह साबित होगी। इस तानाशाही आदेश को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
5 दिनों तक ठप रहेंगे तहसील के सभी न्यायिक व रजिस्ट्री कार्य
शासन के इस फैसले के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए तहसील बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से आंदोलन की रणनीति तैयार की है। इसके तहत आगामी सोमवार (29 जून) से लेकर शुक्रवार (3 जुलाई) तक क्षेत्र के सभी अधिवक्ता सामूहिक रूप से हड़ताल पर रहेंगे।
अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने के कारण इस पूरी अवधि में बैनामा (रजिस्ट्री), दाखिल-खारिज, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य तथा उपजिलाधिकारी व तहसीलदार न्यायालयों के सभी न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहेंगे, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
शासन से की आदेश पुनर्विचार की मांग
तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश शासन और संबंधित उच्चाधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि वे अधिवक्ताओं की जायज भावनाओं और हितों का सम्मान करें। बार ने चेतावनी दी है कि यदि इस जनविरोधी आदेश पर तत्काल पुनर्विचार कर इसे वापस नहीं लिया गया, तो अधिवक्ता इस आंदोलन को और अधिक उग्र तथा अनिश्चितकालीन करने के लिए विवश होंगे। बैठक में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव सहित भारी संख्या में वरिष्ठ व युवा अधिवक्ता मौजूद रहे।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) June 27, 2026













