सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जिला कारागार सिद्धार्थनगर में बंदियों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कायाकल्प के लिए एक अनूठी पहल की जा रही है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जिला कारागार सिद्धार्थनगर में बंदियों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कायाकल्प के लिए एक अनूठी पहल की जा रही है। जेल अधीक्षक सचिन वर्मा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कारागार परिसर में प्रतिदिन प्रातःकाल नियमित रूप से ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ एवं योग सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष सुधार कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के वरिष्ठ प्रशिक्षक अभिनव मालवीय और प्रशिक्षिका प्रतिभा द्विवेदी द्वारा बंदियों के साथ-साथ जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी योग, प्राणायाम, ध्यान मेडिटेशन और जीवन प्रबंधन की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मानसिक तनाव से मुक्ति और सुदर्शन क्रिया पर जोर
कारागार में संचालित यह अभियान केवल एक नियमित योगाभ्यास मात्र नहीं है, बल्कि यह बंदियों के व्यक्तित्व निर्माण और अवसाद (मानसिक तनाव) को कम करने का एक बेहद प्रभावी माध्यम बन चुका है। प्रतिदिन सुबह जेल परिसर में बड़ी संख्या में बंदी एकत्रित होते हैं और प्रशिक्षकों के निर्देशन में योगासन, ध्यान और आर्ट ऑफ लिविंग की प्रसिद्ध ‘सुदर्शन क्रिया’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। प्रशिक्षक अभिनव मालवीय बंदियों को स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक चिंतन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, वहीं प्रशिक्षिका प्रतिभा द्विवेदी द्वारा सिखाए जा रहे प्राणायाम और ध्यान से बंदियों की मानसिक एकाग्रता, आत्मनियंत्रण और आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है।
प्रेरणा स्रोत बने जेल अधीक्षक, स्वयं करते हैं योगाभ्यास
इस पूरे कार्यक्रम की सबसे विशेष और उल्लेखनीय बात यह है कि जिला कारागार के अधीक्षक सचिन वर्मा स्वयं प्रतिदिन इन योग सत्रों में जमीन पर बैठकर सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। जेल अधीक्षक की यह नियमित सहभागिता बंदियों और जेल वार्डनों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत बनी हुई है। अधीक्षक सचिन वर्मा ने बताया कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य केवल अपराधियों को दंड देना नहीं, बल्कि उनके भीतर सकारात्मक मानवीय परिवर्तन लाना है। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी व्यक्ति के संतुलित व सफल जीवन की आधारशिला हैं, इसी उद्देश्य से कारागार में इन आध्यात्मिक गतिविधियों को अनिवार्य रूप से संचालित किया जा रहा है।
अपराध बोध और क्रोध से मिल रही मुक्ति, सुधर रहा व्यवहार
जेल प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के अनुसार, नियमित योग व ध्यान के अभ्यास से बंदियों के आपसी व्यवहार में भारी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। बंदियों के बीच होने वाले आपसी मनमुटाव, डिप्रेशन, क्रोध और मानसिक अशांति जैसी गंभीर समस्याओं में भारी कमी आई है। कई बंदियों ने स्वयं अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन सत्रों से उन्हें आंतरिक शांति मिली है और अब वे अपराध बोध से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की सकारात्मक सोच विकसित कर रहे हैं। इसके साथ ही, जेल के प्रहरियों और अधिकारियों का भी कार्यस्थल पर तनाव कम हुआ है, जिससे जेल का प्रशासनिक वातावरण अधिक ऊर्जावान और अनुशासित नजर आ रहा है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) June 22, 2026












