धनारी के थाने में आग लगाने वाले ग्रामीण की मौतः ड्रोन की निगरानी में अंतिम संस्कार, सीओ-पीएसी समेत 80 पुलिसकर्मी तैनात रहे

संभल

संभल/ गुन्नौर धनारी थाना परिसर में आत्मदाह का प्रयास करने वाले बगढेर गांव निवासी ग्रामीण मोरध्वज की दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


संभल/ गुन्नौर धनारी थाना परिसर में आत्मदाह का प्रयास करने वाले बगढेर गांव निवासी ग्रामीण मोरध्वज की दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। रविवार को उसके पैतृक गांव बगढेर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम संस्कार कराया गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। पांच थानों की पुलिस, पीएसी और सीओ गुन्नौर अंकित मिश्रा के नेतृत्व में करीब 80 पुलिसकर्मी तैनात रहे, जबकि पूरे गांव की निगरानी ड्रोन कैमरों के जरिए की गई।

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 18 जून को धनारी थाना परिसर में सामने आया था। एक दिन पहले 17 जून को गांव में बच्चों के मुंडन संस्कार के दौरान मोरध्वज पुत्र भूरे सिंह और सुरेंद्र पक्ष के बीच विवाद और मारपीट हो गई थी। सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए मोरध्वज के दो भाइयों लखपत सिंह और भारत सिंह को हिरासत में ले लिया था। इसी कार्रवाई से आहत होकर मोरध्वज ने थाना परिसर में आत्मदाह का प्रयास कर लिया।

गंभीर रूप से झुलसे मोरध्वज को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहजोई ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे जिला संयुक्त चिकित्सालय संभल और फिर मेरठ रेफर किया गया। बाद में गुरुवार देर रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार दोपहर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मौत की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर रखे थे। धनारी, गुन्नौर, रजपुरा, बहजोई और जुनावई थानों की पुलिस के अलावा पीएसी बल को भी तैनात किया गया। ड्रोन कैमरों से पूरे गांव और अंतिम संस्कार स्थल की निगरानी की गई ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

इंस्पेक्टर नरेश पाल यादव ने बताया कि शाम करीब 5:30 बजे शांतिपूर्ण माहौल में अंतिम संस्कार संपन्न हो गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। एहतियातन गांव में पुलिस बल तैनात रखा गया है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

पुलिस जांच में जुटी, उकसाने वालों की तलाश

मामले को लेकर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि घटना के दौरान मोरध्वज के पास ज्वलनशील पदार्थ कहां से आया और उसे यह कदम उठाने के लिए किसने उकसाया। पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि जांच के दौरान जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि विवाद से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उसे भाइयों की रिहाई के लिए ऐसा कदम उठाने की सलाह दी गई थी। हालांकि पुलिस इन तमाम पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मोरध्वज की मौत के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में कोहराम मचा हुआ है और दोनों पत्नियों का रो-रोकर बुरा हाल है। पांच वर्षीय बेटा हिमांशु अभी पूरी तरह से यह समझ भी नहीं पा रहा कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है।

ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 17 वर्ष पहले मोरध्वज की शादी मीरा देवी से हुई थी, लेकिन लंबे समय तक संतान नहीं हुई। इसके बाद मीरा देवी ने ही करीब छह वर्ष पहले अपनी छोटी बहन माया देवी से मोरध्वज का दूसरा विवाह करा दिया था। माया देवी से उन्हें पुत्र हिमांशु हुआ, जिसकी उम्र लगभग पांच वर्ष है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद मजबूत नहीं बताई जा रही है। अमरोहा जिले के चंदनपुर स्थित त्रिवेणी शुगर यूनिट में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत मोरध्वज की आय से ही परिवार का भरण-पोषण होता था। अब ग्रामीण परिवार के भविष्य और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल बगढेर गांव बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जहां मामले की हर पहलू से जांच में जुटी है, वहीं गांव में अब भी तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है।

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