यूपी: ग्राम प्रधानों के कार्यकाल का काउंटडाउन शुरू, 25 मई तक भुगतान और अधूरे कार्य निपटाने का अल्टीमेटम

सिद्धार्थनगर

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। इसे देखते हुए पंचायती राज विभाग ने कमर कस ली है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। इसे देखते हुए पंचायती राज विभाग ने कमर कस ली है। कार्यकाल समाप्ति के अंतिम दिनों में वित्तीय अनियमितताओं और भुगतान संबंधी विवादों को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

25 मई तक की डेडलाइन: बजट से अधिक काम पर रोक

सिद्धार्थनगर जनपद के जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) वाचस्पति झा ने जिले के सभी ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों को कड़ा निर्देश दिया है कि 25 मई तक हर हाल में स्वीकृत विकास कार्यों को पूर्ण कर लिया जाए। साथ ही, लंबित भुगतान के मामलों का निस्तारण भी इसी समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया है।

बजट की सीमा में कार्य: पंचायतों में केवल वही कार्य कराए जाएं जिनके लिए खाते में धनराशि उपलब्ध है।

सचिवों की जवाबदेही :यदि बजट से अधिक कार्य कराया गया या भुगतान को लेकर कोई विवाद उत्पन्न हुआ, तो इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

वित्तीय अनुशासन: बिना बजट के कराए गए कार्यों का उत्तरदायित्व प्रधान और सचिव पर तय किया जाएगा।

अधूरे कार्यों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार की शिकायत, बकाया भुगतान या वित्तीय विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसके लिए ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक और सचिवों को आपसी समन्वय से अभिलेखों का निस्तारण करने को कहा गया है।

अधूरे पड़े सामुदायिक भवनों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचों को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

पंचायतों में बढ़ी हलचल

कार्यकाल समाप्ति की तारीख नजदीक आते देख जनपद की ग्राम पंचायतों में सरगर्मी तेज हो गई है। सचिवों और प्रधानों के बीच बैठकों का दौर जारी है। हर पंचायत की कोशिश है कि 26 मई से पहले सभी पेंडिंग फाइलों को क्लियर कर लिया जाए और अभिलेखीय औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि कार्यकाल के अंतिम समय में किसी कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई की नौबत न आए।

विवाद मुक्त हैंडओवर की तैयारी

डीपीआरओ की इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य पंचायतों का विवाद मुक्त हैंडओवर सुनिश्चित करना है। कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों की कमान प्रशासकों के हाथ में जा सकती है, ऐसे में पुराने कार्यों का हिसाब-किताब पहले ही साफ रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

 

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