बिहार में सम्राट युग का आगाज़ RJD से शुरू हुआ सफर अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा

ब्‍यूरो रिपोर्ट

बिहार की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। कभी चर्चाओं से दूर रहने वाले सम्राट चौधरी अब बिहार के नए बादशाह बनने की दहलीज पर हैं।

बिहार की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। कभी चर्चाओं से दूर रहने वाले सम्राट चौधरी अब बिहार के नए बादशाह बनने की दहलीज पर हैं। भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब उनकी ताजपोशी महज एक औपचारिकता रह गई है। यह बदलाव बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के लंबे युग के अवसान और सम्राट युग के उदय का संकेत माना जा रहा है।

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर 1990 के दशक में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से शुरू हुआ था। साल 1999 में वे राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने, लेकिन कम उम्र के विवाद के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। साल 2000 में परबत्ता से विधायक चुने गए, लेकिन निर्वाचन रद्द होने और उसके बाद लगातार तीन चुनावी हार (2004 व 2005) ने उनके धैर्य की कड़ी परीक्षा ली।

 

2010 में मजबूत वापसी के बाद उन्होंने 2014 में JDU का दामन थामा और जीतन राम मांझी सरकार में मंत्री बने। हालांकि, उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2017 में आया जब वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। भाजपा में आने के बाद उनकी प्रगति की रफ्तार बेहद तेज रही।

2020 में विधान परिषद सदस्य, 2021 में पंचायती राज मंत्री और मार्च 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। जनवरी 2024 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद, 2025 के विधानसभा चुनाव में तारापुर सीट से मिली प्रचंड जीत ने उनके नेतृत्व पर मुहर लगा दी। अब भाजपा में महज 9 वर्षों के भीतर वे मुख्यमंत्री की कमान संभालने को तैयार हैं, जो उनके संघर्ष और रणनीतिक कौशल का परिणाम है।

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