बुलंदशहर:दानपुर में आलू की फसल पर पाले का ‘प्रहार’ लागत निकलना भी हुआ दूभर, किसानों ने लगाई मुआवजे की गुहार

दानपुर (बुलंदशहर)

बुलंदशहर जिले के दानपुर क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच गिरे भीषण पाले ने आलू उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जिले के दानपुर क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच गिरे भीषण पाले ने आलू उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। गुरुवार को अचानक गिरे पाले से खेतों में खड़ी आलू की फसल पूरी तरह झुलस गई है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ा है। मेहनत और पूंजी गंवा चुका किसान अब बर्बादी की कगार पर खड़ा है।

भीषण ठंड के कारण आलू की पत्तियां काली पड़कर झुलस गई हैं। किसानों का कहना है कि पाले के कारण पौधों का विकास रुक गया है और जमीन के भीतर आलू के कंद सड़ने लगे हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल पैदावार को कम किया है, बल्कि आलू के आकार और चमक को भी बिगाड़ दिया है, जिससे बाजार में इसकी मांग और कम हो गई है।

दोहरी मार: कम दाम और भारी लागत

किसान लोकेश कुमार, देवी राम, कन्हैया लाल, अतीश पाल और मनवीर ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि इस सीजन में खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई पर भारी खर्च किया गया था। लेकिन अब बाजार में आलू के दाम इतने गिर चुके हैं कि लागत निकालना भी नामुमकिन हो रहा है। किसानों ने बताया कि एक तरफ पाले ने फसल तबाह की, तो दूसरी तरफ गिरते बाजार भाव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

विशेषज्ञ की सलाह नमी से मिल सकती है राहत

दानपुर स्थित राजकीय आलू फार्म के प्रभारी शंकर लाल ने किसानों को तकनीकी सलाह देते हुए बताया कि पाला गिरने की स्थिति में आलू की फसल को बचाने के लिए खेतों में उचित नमी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नमी होने से पाले का असर कम होता है, इसलिए किसान हल्की सिंचाई जरूर करें।

 

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