लखनऊ
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुचिता और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुचिता और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। एसटीएफ की जांच में बड़े पैमाने पर धांधली, पेपर लीक और नकल माफिया की संलिप्तता पाए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह कड़ा कदम उठाया है।
इस परीक्षा के माध्यम से एडेड डिग्री कॉलेजों में 1253 रिक्त पदों को भरा जाना था, जिसके लिए करीब 82 हजार अभ्यर्थियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी।
STF की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने एसटीएफ को गोपनीय जांच के निर्देश दिए थे। जांच में सामने आया कि:
गोपनीय सहायक की मिलीभगत: आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति पांडेय का गोपनीय सहायक महबूब अली मुख्य आरोपी निकला। उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्र निकाल लिए थे।
पेपर की खरीद-फरोख्त: महबूब अली ने अपने साथियों (बैजनाथ पाल और विनय पाल) के साथ मिलकर अभ्यर्थियों से भारी रकम लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे।
डाटा एनालिसिस से पुष्टि: एसटीएफ ने संदिग्ध अभ्यर्थियों के मोबाइल डाटा और आयोग के रिकॉर्ड का मिलान किया, जिससे परीक्षा की शुचिता भंग होने की पुख्ता पुष्टि हुई।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: अध्यक्ष का इस्तीफा और गिरफ्तारी
जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पहले ही तत्कालीन आयोग अध्यक्ष से त्यागपत्र ले लिया था। लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। गौरतलब है कि 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित इस परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद साक्षात्कार की तैयारी थी, लेकिन अभ्यर्थियों के भारी विरोध और एसटीएफ की रिपोर्ट ने पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए थे।
“युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं” – मुख्यमंत्री
परीक्षा निरस्त करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त लहजे में कहा
“हमारी सरकार सभी चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए संकल्पित है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। परीक्षा की शुचिता पर आंच आते ही हमने इसे रद्द करने का निर्णय लिया है।”
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