सिद्धार्थनगर पुलिस की बड़ी जीत: साइबर ठगी का शिकार हुई महिला को वापस दिलाए ₹92,000

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। थाना कठेला समयमाता की साइबर टीम ने तत्परता दिखाते हुए एक महिला पीड़िता के खाते से उड़ाए गए 92 हजार रुपये की पूरी रकम रिकवर कर ली है। पुलिस की इस कार्रवाई ने जिले में साइबर सुरक्षा के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत कर दिया है।

क्या था मामला?

जानकारी के अनुसार, कठेला समयमाता क्षेत्र की एक महिला साइबर फ्रॉड का शिकार हो गई थी। शातिर ठगों ने झांसा देकर उसके बैंक खाते से कुल 92,000 रुपये पार कर दिए थे। मेहनत की कमाई छिन जाने से परेशान पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

थानाध्यक्ष के नेतृत्व में “एक्शन” मोड में आई टीम
पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार, थानाध्यक्ष अभय सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष साइबर टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। टीम ने डिजिटल पदचिह्नों (Digital Footprints) का पीछा करते हुए उस बैंक खाते और ट्रांजैक्शन आईडी को ट्रेस किया, जहाँ पैसे ट्रांसफर किए गए थे।

पूरी रकम हुई रिकवर (100% रिकवरी)

साइबर पुलिस ने बैंक और संबंधित गेटवे से समन्वय स्थापित कर ठगी गई राशि को फ्रीज कराया। पुलिस की कड़ी मेहनत का नतीजा यह रहा कि पीड़िता की पूरी रकम 92,000 रुपये वापस मिल गई। आमतौर पर साइबर ठगी के मामलों में आंशिक रकम ही मिल पाती है, लेकिन पूरी रकम वापस दिलाकर कठेला समयमाता पुलिस ने एक मिसाल कायम की है।

“साइबर अपराध पर लगाम लगाना और पीड़ितों को त्वरित राहत पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है। हम तकनीकी रूप से खुद को और मजबूत कर रहे हैं ताकि अपराधियों को बख्शा न जाए।” — मयंक द्विवेदी, क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़

पीड़िता ने जताया आभार

अपनी डूबी हुई रकम वापस पाकर महिला के चेहरे पर खुशी लौट आई। उन्होंने पुलिस टीम की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए थानाध्यक्ष और पूरी साइबर टीम को धन्यवाद दिया। जिले के आला अधिकारियों ने भी इस सफलता पर टीम की पीठ थपथपाई है।

पुलिस की अपील (सावधानी बरतें)किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना OTP या पिन शेयर न करें।संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।ठगी होने पर तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) या संबंधित थाने को सूचित करें।

 

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