चालक-परिचालकों का ‘अकाल’ मेरठ में 136 बसें खड़ी, सरकारी खजाने को भारी नुकसान

मेरठ

मेरठ जनपद के उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मेरठ परिक्षेत्र में स्टाफ की भारी कमी के कारण परिवहन सेवा बुरी तरह चरमरा गई है। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


मेरठ जनपद के उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मेरठ परिक्षेत्र में स्टाफ की भारी कमी के कारण परिवहन सेवा बुरी तरह चरमरा गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेरठ परिक्षेत्र की कुल 136 बसें केवल ड्राइवर और परिचालकों (कंडक्टरों) के अभाव में डिपो में खड़ी हैं।

यह स्थिति तब है जब ये बसें सरकारी खजाने के पैसे से खरीदी गई हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। इन बसों के रूट पर न चलने से रोडवेज को रोजाना लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है।

रोडवेज अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि स्टाफ की भारी कमी के बावजूद वे समय पर नई भर्ती प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं कर पाए हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण एक ओर जहाँ सरकारी संपत्ति (बसें) निष्क्रिय खड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे निजी (डग्गामार) वाहनों को फलने-फूलने का मौका मिल रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर बसों के संचालन को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

 

 

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