महराजगंज : दफ्तर के अफसर क्या जानें लाचार परिवार की झुग्गी-झोपड़ियों के आशियाने में रहने का दर्द? सरकारी परियोजनाओं के लाभ में भ्रष्ट जिम्मेदार अड़ा दे रहें टांग

महराजगंज

महराजगंज जिले का एक ऐसा परिवार जो सरकारी परियोजनाओं और विकास के सपने देख रहा है लेकिन भ्रष्टाचार इस क़दर घेरा हुआ है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट 

महराजगंज जिले का एक ऐसा परिवार जो सरकारी परियोजनाओं और विकास के सपने देख रहा है लेकिन भ्रष्टाचार इस क़दर घेरा हुआ है कि उस मासूम गरीब परिवार के सपने साकार होने में बांधा बन रहा है।

आपको बता दें कि निचलौल विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा बैदौली टोला बनकट्टी निवासी बृजेश कुशवाहा का आशियाने की स्थिति देखने के बाद वास्तव में आंखें नम हो जायेंगी।

उक्त परिवार जिस झुग्गी-झोपड़ियों में निवास करता है वह भी अब साथ छोड़ता चला जा रहा है। टूटे-फूटे खम्भे और कमजोर दीवारों पर टिका आशियाना अब गरीब परिवार के लिए संकट पैदा कर रहा है। ग्रामीण आवास एवं शौचालय निर्माण जैसी सरकार द्वारा संचालित परियोजनाएं इस मासूम परिवार के लिए अभी तक सपना ही बना हुआ है और जब कभी यह इस सपना के हकीकत में बदलने की बारी आती है तो भ्रष्ट जिम्मेदार और लापरवाह संबंधित अधिकारी अपने भ्रष्ट करतूतों से उस मासूम परिवार के सपने को हकीकत में बदलने में टांग अड़ा देतें हैं।

वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवादाता ने इस संबंध में जब लाचार परिवार से बातचीत किया तो परिवार के लोगों ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। परिवार वालों ने बताया कि एक बार आवास लिस्ट में मेरा नाम आया हुआ था, लेकिन भ्रष्ट जिम्मेदारों ने साजिश रच कर मेरा नाम लिस्ट से हटवा दिया और शौचालय निर्माण के लिए तत्कालिक ग्राम प्रधान ने मुझसे ₹2000 यह कहकर ले लिया कि आपका शौचालय बन जायेगा, लेकिन अभी तक पूरी तरह से शौचालय नहीं बन सका। न तो शौचालय का सीट है और न ही दरवाजा, केवल दीवारें खड़ी हैं जिसकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है।
सरकारी परियोजनाएं सरकार द्वारा तो संचालित कर दी जाती है लेकिन स्थानीय भ्रष्ट जिम्मेदार और निम्न स्तर के अधिकारी उन परियोजनाओं में टांग अड़ा कर गरीब परिवारों एवं सरकार के सपनों और अरमानों पर पानी फेर देते हैं।

मासूम गरीब परिवार ने आरोप लगाया है कि मेरा नाम आवास लिस्ट से हटा दिया गया। यदि यह आरोप सत्य होगा तो ब्लॉक के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए इससे अधिक शर्म की बात कोई दूसरी नहीं हो सकती। एक परिवार जो दिन भर कड़ी मेहनत करने के बाद रात में चैन की नींद लेने के लिए सोता है और आधी रात में बारिश की बूंदें टपक कर उसे जगा देतीं है और बैठकर रातें गुजारने को मजबूर कर देती हैं। ऐसे परिवार का आवास लिस्ट से नाम हटा तो कैसे हटा? क्या बिना जमीनी सत्यापन के कागजों का खेल कागजों में ही खेल दिया गया और पात्र परिवार उस लाभ से वंचित रह गया।
दफ्तर में बैठ कुर्सियां तोड़ने से जमीनी हकीकत नहीं आंकी जा सकती है। उसके लिए उन दफ्तर की कुर्सियों की मोह-माया को छोड़ कर जमीनी स्तर पर अपने कार्य को निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं ईमानदारी पूर्वक अंजाम देना पड़ेगा तब जाकर सरकारी परियोजनाएं और सरकार के सपने साकार हो पायेंगे और पात्र लाभार्थी उस योजना का लाभ उठा पाएंगे।

 

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