समर कैम्प में चमके विद्यार्थी : समर कैम्प में सन्ध्या ने पंजा कुश्ती में मारी बाज़ी

गोसाईगंज (लखनऊ)

गर्मियों की दोपहरें जब आलस्य से लदी होती हैं, तब राजकीय हाईस्कूल मस्तेमऊ, गोसाईगंज के प्रांगण में ऊर्जा की लहर दौड़ रही थी। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

गर्मियों की दोपहरें जब आलस्य से लदी होती हैं, तब राजकीय हाईस्कूल मस्तेमऊ, गोसाईगंज के प्रांगण में ऊर्जा की लहर दौड़ रही थी। योग, स्वदेशी खेलों और आत्मरक्षा के अभ्यास से भरे समर कैम्प में न केवल विद्यार्थियों ने भागीदारी की, बल्कि अपने भीतर छिपी संभावनाओं को भी नये आकार दिए।

यह विशेष प्रशिक्षण शिविर उ.प्र. नॉन ओलंपिक एसोसिएशन एवं विद्यालय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया, जिसमें अष्टांग योग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम — के साथ-साथ सेल्फ डिफेंस और स्वदेशी खेलों की विधाएं सिखाई गईं। शिविर की सबसे रोमांचक कड़ी रही — मार्शल आर्ट्स की पंजा कुश्ती प्रतियोगिता, जिसमें विद्यार्थियों ने शक्ति और संतुलन का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

इस प्रतियोगिता में कक्षा 10 की छात्रा सन्ध्या ने अपने आत्मविश्वास, अभ्यास और एकाग्रता के बल पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, पायल ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया।

इन विजेताओं को संस्था के पदाधिकारियों द्वारा प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। मेडल उनके गले में न केवल जीत का प्रतीक था, बल्कि यह भी प्रमाण था कि अभ्यास, अवसर और आत्मबल के सम्मिलन से असंभव भी संभव होता है।

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती कुसुम वर्मा ने इस अवसर पर कहा— “यह देखकर प्रसन्नता होती है कि जिन बच्चों को मार्शल आर्ट की आधारभूत जानकारी भी नहीं थी, वे कुछ ही दिनों में तकनीकी दक्षता के साथ प्रतियोगिता में विजयी बनें। यह शिविर विद्यार्थियों में आत्मरक्षा की कला के साथ-साथ आत्मविश्वास और संयम का भी विकास कर रहा है।”

समर कैम्प के अंतर्गत आयोजित विविध गतिविधियाँ — योग, खेल, आत्मरक्षा, सामूहिक अभ्यास — विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ सामूहिकता, नेतृत्व और आत्मानुशासन को भी नया आयाम दे रही हैं। प्रत्येक गतिविधि एक बीज की तरह थी, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व की धरती में बोया गया — और अब अंकुर बन फूट पड़ा है।

शिविर के अंत में एक सन्देश साफ़ था — प्रतिभा किसी कोने में छिपी नहीं रहती, यदि उसे मंच और मार्ग मिल जाए। और उस दिन, सन्ध्या की मुट्ठी में केवल प्रतिद्वंद्वी की कलाई नहीं, आत्मविश्वास की विजय थी।

 

Voice Of News 24 

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