Voice Of News 24:शिवभक्त के तांडव मचाने का सबसे बड़ा दिन आज, जानें महाशिवरात्रि पर्व मनाने के पिछे की पूरी कहानी!

आस्था के सबसे बड़े पर्वों में एक अहम स्थान रखने वाले त्योहार महाशिवरात्रि के बारे में पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

भगवान शिव की आस्था में विश्वास रखने वालें शिवभक्तों के लिए आज का दिन बेहद खास हैं। आज महाशिवरात्रि पर शिवभक्तों में एक अलग ही उत्साह और उमंग देखने को मिलता है। इस पर्व की तैयारियां महीनों पहले ही शुरू हो जाती है। लोग आस-पास के शिव मंदिरों की साफ-सफाई में महीनों पहले ही लग जाते हैं और महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं।
इस बार यानी 2025 में महाशिवरात्रि का पर्व आज 26 फरवरी को लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं और जगह-जगह शिव मंदिरों में लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। जहां एक तरफ लोग पूरे परिवार के साथ शिव मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कई स्थानों पर विशाल मेले का भी आयोजन किया गया है और लोग परिजनों के साथ मेले का भी लुत्फ उठा रहे हैं।

महाशिवरात्रि मनाने का कुछ मुख्य कारण

महाशिवरात्रि के संबंध में पौराणिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवजी ने वैराग्य का त्याग कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया और माता पार्वती से विवाह किया। इसी कारण, हर वर्ष शिव-गौरी के विवाह उत्सव के रूप में महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है।

महाशिवरात्रि के संदर्भ में यह भी विचार प्रचलित है

महाशिवरात्रि का अर्थ है ‘शिव की रात’। महाशिवरात्रि भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करने का एक विशेष अवसर माना जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पहली बार भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग में प्रकट हुए थे और जिसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया गया।

ज्योतिर्लिंग का अर्थ

ज्योतिर्लिंग का अर्थ है कि,शिव का ज्योति के रूप में प्रकट होना। ज्योतिर्लिंग शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, ज्योति और लिंग। ज्योति का मतलब प्रकाश और लिंग का मतलब प्रतीक। जो भगवान शिव की ऊर्जा का प्रतीक हैं।

 

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