वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर को लेकर आज जिला अदालत का बड़ा फैसला आया। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका ही खारिज कर दी

 12 Sep 2022 05:41 PM

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में दायर वाद पर वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने सोमवार को अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला जज ने सबसे पहले केस की मेरिट पर सुनवाई की। मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से 7 रूल 11 (7/11) के प्रार्थना पत्र पर अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनी। मुस्लिम पक्ष ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को आधार बनाया था और कहा था कि ऐसे मुकदमे कोर्ट में दायर नहीं किए जा सकते हैं। बहस के बाद मुस्लिम पक्ष की दलील को अदालत ने खारिज कर दिया है।

आम भाषा में अगर ऑर्डर 7 रूल नंबर 11 को समझा जाए तो इसके तहत कोर्ट किसी केस में तथ्यों की मेरिट पर विचार करने के बजाए सबसे पहले ये तय करता है कि क्या याचिका सुनवाई करने लायक है या नहीं। जो राहत की मांग याचिकाकर्ता की ओर से मांगी जा रही है, क्या उसे कोर्ट द्वारा दिया भी जा सकता है या नहीं। अगर कोर्ट को ये लगता है कि याचिका में मांगी गई राहत दी ही नहीं जा सकती तो कोर्ट केस की मेरिट पर जाने के बजाए बिना ट्रायल के ही याचिककर्ता को सुनने से इनकार कर सकता है।

रूल 7 के तहत कई वजह है, जिनके आधार पर कोर्ट शुरुआत में ही याचिका को खारिज कर देता है। मसलन अगर याचिकाकर्ता ने वाद को दाखिल करने की वजह स्पष्ट नहीं की हो या फिर उसने दावे का उचित मूल्यांकन न किया हो या उसके मुताबिक कोर्ट फीस न चुकाई गई हो। इसके अलावा जो एक महत्वपूर्ण आधार है वो है कि कोई कानून उस मुकदमे को दायर करने से रोकता हो।

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