लखनऊ

लखनऊ राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में सोमवार को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्यरत बीसी सखियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

लखनऊ राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में सोमवार को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत कार्यरत बीसी सखियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। मानदेय बढ़ाने और सपोर्ट फंड माफ करने की मांग के साथ बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इको गार्डन से निकलकर जब प्रदर्शनकारी महिलाएं विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़ीं, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद उन्होंने सड़क जाम कर विरोध दर्ज कराया।
96 पैसे कमीशन में घर चलाना मुश्किल
प्रदर्शनकारी रवीना ने बताया कि वर्ष 2018 में उनकी भर्ती हुई थी। उनका मुख्य काम ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है। भर्ती के शुरुआती 6 महीने तक ₹4,000 मानदेय मिला, लेकिन उसके बाद ₹500 के लेन-देन पर महज 96 पैसे का कमीशन दिया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि इतनी भीषण महंगाई में इतने कम पैसे से घर का चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है।
सपोर्ट फंड की वापसी और ₹20 हजार वेतन की मांग
महिलाओं ने मांग रखी कि सरकार द्वारा दिया गया ₹75,000 का सपोर्ट फंड, जिसे अब 4% ब्याज के साथ वापस मांगा जा रहा है, उसे पूरी तरह से माफ किया जाए। बीसी सखियों की इतनी आमदनी नहीं है कि वे यह कर्ज चुका सकें। इसके अलावा, उन्होंने ₹20,000 प्रति माह सम्मानजनक मानदेय देने की मांग उठाई है।
‘नारे सशक्तीकरण के, पर अधिकार गायब’
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूरे प्रदेश में उनकी संख्या लगभग 58,000 है। वे अपनी सुरक्षा और सुकून त्यागकर गांव-गांव सेवाएं देती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उचित मानदेय नहीं मिल रहा। महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तीकरण की बातें तो करती है, लेकिन धरातल पर उनके अधिकार और सम्मानजनक आजीविका देने में नाकाम साबित हो रही है।
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