महराजगंज: बृजमनगंज में दो दिनों की बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की बढ़ाई मुश्किलें, खेतों में बिछी धान की खड़ी फसल

महराजगंज

तेज हवाओं के चलते खेतों में गिर गई धान की फसल, दाने सड़ने का बढ़ा खतरा, मजदूरों की कमी और रबी की बुवाई में देरी की आशंका पूर्व प्रधान एवं सपा नेता दिलीप चौधरी ने जिला प्रशासन से तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति देने की उठाई मांग,पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

तेज हवाओं के चलते खेतों में गिर गई धान की फसल, दाने सड़ने का बढ़ा खतरा, मजदूरों की कमी और रबी की बुवाई में देरी की आशंका पूर्व प्रधान एवं सपा नेता दिलीप चौधरी ने जिला प्रशासन से तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति देने की उठाई मांग,

बृजमनगंज, महाराजगंज। क्षेत्र में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल को मौसम की मार से काफी नुकसान पहुंचा है। बूंदाबांदी के साथ चली तेज हवाओं के कारण अधिकांश खेतों में धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। इससे किसानों के सामने न केवल फसल की कटाई का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि खेतों में गिरी फसल के खराब होने और दाने सड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता खेतों में गिरी धान की फसल को सुरक्षित निकालने की है। सामान्य परिस्थितियों में खड़ी फसल की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर अथवा अन्य कृषि मशीनों के माध्यम से आसानी से की जा सकती है, लेकिन तेज हवाओं के कारण फसल जमीन पर बिछ जाने से मशीनों के जरिए कटाई करना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में किसानों को मजबूरन मजदूरों के सहारे फसल कटवानी पड़ सकती है। पहले से ही धान की कटाई के लिए मजदूरों की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे में अचानक बढ़ी इस समस्या ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

लगातार बारिश के कारण खेतों में नमी भी बढ़ गई है। जिन खेतों में पहले से ही पर्याप्त नमी मौजूद थी, वहां अब अतिरिक्त पानी जमा होने की आशंका है। यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो खेतों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे जमीन पर गिरी धान की फसल लंबे समय तक पानी और नमी के संपर्क में रहकर खराब हो सकती है। किसानों को आशंका है कि समय रहते फसल की कटाई नहीं हो पाई तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

रबी की खेती पर भी पड़ सकता है बारिश का असर

बारिश और खेतों में बढ़ती नमी का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसका प्रभाव आगामी रबी की खेती पर भी पड़ने की आशंका है। किसानों के अनुसार, धान की कटाई के बाद उन्हें गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों की तैयारी करनी होती है। लेकिन लगातार बारिश के कारण खेतों में नमी और पानी बढ़ने से कृषि कार्य प्रभावित हो सकता है। खेतों से पानी निकलने और जमीन के दोबारा खेती योग्य होने में समय लगने पर रबी की फसलों की बुवाई निर्धारित समय से पीछे खिसक सकती है।
ऐसे में किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ तैयार धान की फसल को नुकसान से बचाने की चिंता है तो दूसरी तरफ आगामी रबी की फसलों की समय से बुवाई करने का दबाव है। यदि धान की कटाई में देरी हुई और खेतों में नमी अधिक समय तक बनी रही तो इसका असर अगली फसल की पैदावार पर भी पड़ सकता है।

इन गांवों में धान की फसल को अधिक नुकसान

क्षेत्र में धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान बृजमनगंज क्षेत्र के फुलमनहा, लेहरा, मामी चौराहा, मिश्रावलिया, सोनाबंदी, बहादुरी, लेदवा, सौरहा, मैनहवा, सहजवाबाबू और गुजरौलिया सहित आसपास के गांवों में होने की जानकारी सामने आई है। इन गांवों में कई किसानों की खेतों में खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर गिर गई है। किसानों को अब मौसम साफ होने और जल्द से जल्द फसल की कटाई शुरू होने का इंतजार है।

दिलीप चौधरी ने प्रशासन से की मुआवजे की मांग

इस संबंध में पूर्व प्रधान एवं सपा नेता दिलीप चौधरी ने जिला प्रशासन से प्रभावित गांवों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बारिश और तेज हवाओं के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल गिरने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि जिन किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचा है, उनका निष्पक्ष आकलन कराकर नियमानुसार सरकारी मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अथवा संबंधित फसल बीमा प्रावधानों के अंतर्गत पात्र किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई कि सर्वे की प्रक्रिया में किसी भी प्रभावित किसान का नाम छूटने न पाए और नुकसान का आकलन वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाए, ताकि संकट की इस घड़ी में किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।

फिलहाल मौसम की मार से परेशान किसान अपनी फसल को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। किसानों की निगाहें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई और मौसम के रुख पर टिकी हैं। यदि समय रहते फसल नुकसान का सर्वे कराकर राहत उपलब्ध नहीं कराई गई तो पहले से खेती की लागत और मेहनत से जूझ रहे किसानों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

 

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