जौनपुर

जौनपुर दशहरे पर बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रावण दहन को देखने के लिए जहां लोगों में भारी उत्साह रहता है, वहीं इस परंपरा को भव्य स्वरूप देने वाले कारीगरों की मेहनत भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर दशहरे पर बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रावण दहन को देखने के लिए जहां लोगों में भारी उत्साह रहता है, वहीं इस परंपरा को भव्य स्वरूप देने वाले कारीगरों की मेहनत भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। शाहगंज के भादी ग्राम सभा निवासी लगभग 65 वर्षीय सुब्बन खां का परिवार पिछले तीन दशकों से नहीं बल्कि तीन पीढ़ियों से रावण के पुतले का निर्माण करता आ रहा है। इस वर्ष भी वे पूरी तन्मयता के साथ 75 फीट ऊंचे रावण के भव्य पुतले को आकार देने में जुटे हैं।
सुब्बन खां बताते हैं कि पुतला निर्माण की यह अनूठी परंपरा उनके दादा से शुरू हुई थी, जिसे उनके पिता ने आगे बढ़ाया और अब वे स्वयं इस पारिवारिक विरासत को जीवंत रखे हुए हैं। 12 अक्टूबर से शुरू हुआ यह निर्माण कार्य 19 अक्टूबर की रात तक पूरा करने का लक्ष्य है। बांस, खप्पचियों और पुआल के सहारे इतनी ऊंची और संतुलित आकृति तैयार करना आसान नहीं होता, जिसके लिए वर्षों के अनुभव और विशेष कौशल की आवश्यकता होती है।
उनकी यह कला केवल रावण के पुतले तक सीमित नहीं है, बल्कि वे शाहगंज के ऐतिहासिक ‘भरत मिलाप’ में निकलने वाली कई आकर्षक लागों का निर्माण कर कई बार पुरस्कार भी जीत चुके हैं। करीब 65 वर्ष की उम्र में भी सुब्बन खां की यह लगन शाहगंज की सांस्कृतिक और गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है।
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