जौनपुर

जौनपुर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. आर.के. सिंह के मार्गदर्शन में ‘सुरक्षित एप्लीकेशन विकास’ विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का शानदार शुभारंभ हुआ।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. आर.के. सिंह के मार्गदर्शन में ‘सुरक्षित एप्लीकेशन विकास’ विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का शानदार शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के 90 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने बड़े उत्साह के साथ सहभागिता की।
सुरक्षा को विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनाएं: डॉ. अनुप गिरिधर
कार्यशाला के पहले दिन मुख्य वक्ता एवं विशेषज्ञ डॉ. अनुप गिरिधर ने प्रतिभागियों को सुरक्षित एप्लीकेशन विकास के मूलभूत सिद्धांतों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में केवल उपयोगी और आकर्षक एप्लीकेशन तैयार करना ही काफी नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता, डेटा, सर्वर और संपूर्ण डिजिटल प्रणाली को साइबर हमलों तथा अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित रखना भी बेहद आवश्यक है।
डॉ. गिरिधर ने वर्चुअल मशीन के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में एप्लीकेशन विकसित करने की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एप्लीकेशन तैयार करते समय सुरक्षा को शुरुआत से ही विकास प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया जाना चाहिए, क्योंकि अंतिम चरण में सुरक्षा जोड़ने से कमजोरियों और साइबर जोखिमों की संभावना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल एवं कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा ने विशेषज्ञ डॉ. अनुप गिरिधर का स्वागत और अभिनंदन किया। प्रतिभागियों ने पहले दिन के सत्र को बेहद ज्ञानवर्धक, समसामयिक और प्रेरणादायक बताया।
आयोजकों के अनुसार, छह दिवसीय इस कार्यशाला के आगामी सत्रों में साइबर सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग, डेटा संरक्षण, एप्लीकेशन परीक्षण और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न तकनीकी विषयों पर देश-विदेश के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया जाएगा।
विशेषज्ञ ने उपयोगकर्ता की पहचान की जांच, भूमिका आधारित अधिकार निर्धारण और सुरक्षित प्रमाणीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपयोगकर्ता इनपुट की जांच व शुद्धिकरण को जरूरी बताते हुए एसक्यूएल इंजेक्शन और क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग जैसी साइबर कमजोरियों से बचाव के उपाय साझा किए। इसके अलावा संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए कूटलेखन सुरक्षित संचार माध्यमों और तकनीकी त्रुटि के समय संवेदनशील जानकारी प्रदर्शित न करने के संबंध में भी महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां दीं।
अतिथियों का स्वागत और आगामी सत्र
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर इंजीनियरिंग संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. सौरभ पाल एवं कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भटेजा ने विशेषज्ञ डॉ. अनुप गिरिधर का स्वागत और अभिनंदन किया। प्रतिभागियों ने पहले दिन के सत्र को बेहद ज्ञानवर्धक, समसामयिक और प्रेरणादायक बताया।
आयोजकों के अनुसार, छह दिवसीय इस कार्यशाला के आगामी सत्रों में साइबर सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग, डेटा संरक्षण, एप्लीकेशन परीक्षण और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न तकनीकी विषयों पर देश-विदेश के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया जाएगा।
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