प्रयागराज

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता अपनी वयस्क बालिग बेटी को उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता अपनी वयस्क बालिग बेटी को उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। कोर्ट ने एक मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण हेबियस कॉर्पस याचिका को खारिज करते हुए बालिग बेटी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिकार को सर्वोपरि माना है।
बेटी ने कोर्ट में सुनाई आपबीती
मऊ जिले की रहने वाली कलावती देवी ने अपनी 25 वर्षीय बेटी कुमारी पूजा को अदालत के समक्ष पेश किए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। कोर्ट के निर्देश पर जब युवती को अदालत में पेश किया गया, तो उसने अपनी मां के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया। पूजा ने अदालत को बताया कि वह अपनी मर्जी से दिल्ली में स्वतंत्र रूप से रह रही है और किसी भी अवैध हिरासत में नहीं है। उसने आरोप लगाया कि घर पर रहने के दौरान उसकी मां का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं था, और वे उसे अक्सर मारती-पीटती तथा गालियां देती थीं।
मां-बाप की मर्जी नहीं हो सकती हावी
वहीं, मां कलावती ने बेटी के इन आरोपों से इनकार करते हुए उसे अपने साथ रखने की जिद की। हालांकि, अदालत ने युवती के बयानों और उसकी बालिग उम्र को ध्यान में रखते हुए कहा कि एक वयस्क महिला की स्वायत्तता और उसके व्यक्तिगत निर्णयों की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि केवल माता-पिता होने के आधार पर किसी बालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी के साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने मां की याचिका को खारिज कर दिया।
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