महराजगंज: संघर्ष को सलाम! चाय वाले और चक्की संचालक के बेटों ने नीट में लहराया परचम, विपरीत परिस्थितियों में पेश की मिसाल

महराजगंज

महराजगंज कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का अटूट विश्वास साथ हो, तो आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का अटूट विश्वास साथ हो, तो आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सदर तहसील क्षेत्र के दो होनहार युवाओं ने। झनझनपुर चौराहे पर चाय की दुकान चलाने वाले के बेटे शिवम मद्धेशिया और हरिहरपुर में आटा चक्की संचालित करने वाले के बेटे सूरज मद्धेशिया ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

इस परीक्षा में सूरज मद्धेशिया ने 594 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक12025 प्राप्त की है, जबकि शिवम मद्धेशिया ने 585 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक 15661 हासिल कर डॉक्टर बनने के अपने सपने की ओर बड़ा कदम बढ़ाया है।

चाय-समोसे की दुकान चलाकर पिता ने पूरा किया शिवम का सपना

झनझनपुर निवासी शिवम मद्धेशिया के पिता दिनेश मद्धेशिया चौराहे पर एक छोटी सी चाय और समोसे की दुकान चलाते हैं। घर की आय बेहद सीमित होने के बावजूद उन्होंने कभी भी बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। शिवम ने कक्षा 1 से 10वीं तक की पढ़ाई सेंट जोसेफ्स स्कूल, महराजगंज और इंटरमीडिएट की शिक्षा सरदार वल्लभभाई पटेल इंटर कॉलेज, कसमरिया से पूरी की। इसके बाद वे अपनी तैयारी को धार देने के लिए लखनऊ चले गए और कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। शिवम अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता दिनेश मद्धेशिया, माता ममता मद्धेशिया और अपने गुरुजनों को देते हैं।

आटा चक्की चलाने वाले के बेटे सूरज ने कोटा में गाड़े झंडे
वहीं, सिंदुरिया निवासी सूरज मद्धेशिया के पिता भरत मद्धेशिया हरिहरपुर में आटा चक्की चलाते हैं। सूरज ने कक्षा 1 से 8वीं तक सेंट जोसेफ्स स्कूल और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की शिक्षा बिशप एकेडमी, महराजगंज से पाई। इंटर पास करने के बाद सूरज ने पहले घर पर ही रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और बाद में बेहतर मार्गदर्शन के लिए वे राजस्थान के कोटा चले गए। सूरज अपनी इस कामयाबी का श्रेय पिता भरत मद्धेशिया, माता रीना मद्धेशिया और अपने शिक्षकों को देते हैं।

पेपर लीक ने तोड़ा था हौसला, पर पिताओं के विश्वास से मिली दोबारा जीत

इन दोनों होनहारों के लिए सफलता का यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। पहली बार जब इन्होंने परीक्षा दी थी, तो इन्हें अपनी सफलता पर पूरा भरोसा था। लेकिन, पेपर लीक होने के कारण जब परीक्षा निरस्त कैंसिल हुई, तो दोनों का मनोबल पूरी तरह टूट गया था। उन्हें लगा कि उनकी सालों की मेहनत पर पानी फिर गया।

ऐसे नाजुक और तनावपूर्ण समय में दोनों के पिताओं ने ढाल बनकर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने अपने बेटों को निराश न होने और दोबारा पूरी ताकत से परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया। पिताओं के इसी विश्वास और अपनी अथक मेहनत के बल पर दोनों छात्रों ने दोबारा आयोजित हुई परीक्षा में शानदार रैंक हासिल कर अपने संघर्ष को सही मुकाम तक पहुँचाया।

लक्ष्य: डॉक्टर बनकर करेंगे गरीबों की सेवा

भविष्य की योजनाओं को लेकर शिवम और सूरज दोनों का एक ही अटूट संकल्प है डॉक्टर बनकर समाज के गरीब, मजलूम और जरूरतमंद लोगों की नि:स्वार्थ सेवा करना। इन दोनों युवाओं की यह अभूतपूर्व सफलता आज जनपद के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।

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