महराजगंज: देवदह-रामग्राम को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन स्थल बनाने की कवायद तेज; समिति ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री को सौंपा 6 सूत्रीय मांग पत्र

लखनऊ

भगवान बुद्ध की ननिहाल देवदह और उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थल रामग्राम को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

भगवान बुद्ध की ननिहाल देवदह और उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थल रामग्राम को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। सोमवार को ‘देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति’ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने दोनों ऐतिहासिक क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, सड़क संपर्क, पुरातात्विक उत्खनन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर एक छह सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।

उपेक्षा का दंश झेल रहा है बुद्ध का ऐतिहासिक ननिहाल: जितेंद्र राव

समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने इन क्षेत्रों के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लक्ष्मीपुर विकास खंड के अंतर्गत स्थित देवदह साक्षात भगवान बुद्ध का ननिहाल माना जाता है। इस पावन भूमि पर आज भी भगवान बुद्ध और उनकी माता महामाया के प्राचीन स्तूप, महाराज अंजन का राजमहल, विख्यात पुरातत्वविद मिस्टर कलिंघम द्वारा निर्मित पिलर, सम्राट अशोक का अमूल्य शिलालेख, ऐतिहासिक सगरा और लगभग 200 प्राचीन कुएं मौजूद हैं।

उन्होंने मलाल जताते हुए कहा कि इतना समृद्ध और गौरवशाली इतिहास होने के बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय से प्रशासनिक और राजनीतिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। हालांकि, पर्यटन विभाग ने वर्तमान में यहाँ ऐतिहासिक सगरा का सुंदरीकरण, विपश्यना हॉल और अतिथि गृह का निर्माण कराया है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए अभी बड़े और व्यापक विकास कार्यों की दरकार है।

समिति की छह सूत्रीय प्रमुख मांगें

समिति ने सौंपे गए मांग पत्र में मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया है,

पिच मार्ग का निर्माण: मिनी गोरखनाथ मंदिर (चौक बाजार) से रामग्राम होते हुए बनरसिंहा कला तक नए पिच मार्ग का तत्काल निर्माण किया जाए।

सड़क कनेक्टिविटी: चौक बाजार से टेढ़ी, जंगल गुलहरिया होते हुए देवदह को जोड़ने वाली जर्जर सड़क का नवनिर्माण कराया जाए।

बौद्ध परिपथ परियोजना: पूर्व में प्रस्तावित कुशीनगर-देवदह-कपिलवस्तु बौद्ध परिपथ परियोजना को फाइलों से निकालकर धरातल पर शीघ्र शुरू किया जाए।

100 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा: देवदह स्थित ऐतिहासिक सगरा के ऊंचे टीले पर भगवान बुद्ध, माता महामाया और महाराज अंजन की एक 100 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए।

संग्रहालय का निर्माण: क्षेत्र से उत्खनन में निकलने वाले प्राचीन अवशेषों को सहेजने के लिए यहाँ एक भव्य और आधुनिक संग्रहालय (Museum) का निर्माण हो।

प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल

लखनऊ पहुंचे इस विशेष प्रतिनिधिमंडल में समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव के साथ उपाध्यक्ष महेंद्र जायसवाल, महामंत्री लक्ष्मीचंद पटेल और संरक्षक गामा प्रसाद सहित संगठन के कई अन्य प्रमुख सदस्य शामिल थे। केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद समिति पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से देवदह और रामग्राम क्षेत्र को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान मिल सकेगी।

 

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