बुलंदशहर: पुलिस लाइन में साइबर जागरूकता कार्यशाला आयोजित; बिना कोर्ट ऑर्डर पीड़ितों को वापस मिलेगी ठगी की रकम, एएसपी ने दी ‘MRM’ की जानकारी

बुलंदशहर

बुलंदशहर जनपद में डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी लगाम लगाने और ठगी के शिकार पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से रविवार को पुलिस लाइन सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक व कार्यशाला का आयोजन किया गया। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद में डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी लगाम लगाने और ठगी के शिकार पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से रविवार को पुलिस लाइन सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक व कार्यशाला का आयोजन किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक अपराध नरेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में जनपद के समस्त बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी और सभी थानों की साइबर सेल में नियुक्त पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मुख्य रूप से शामिल हुए।

MRM मॉड्यूल से आसान होगी ठगी की रकम वापसी की प्रक्रिया

कार्यशाला के दौरान एएसपी अपराध नरेश कुमार ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित MRM संबंध में उपस्थित बैंक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को विस्तृत तकनीकी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस नए मॉड्यूल के अंतर्गत यदि किसी नागरिक के साथ 50,000 रुपये से कम की साइबर ठगी होती है, तो उस धनराशि को बिना किसी अदालती आदेश के सीधे पीड़ित के खाते में वापस कराया जा सकता है। इस प्रक्रिया से पीड़ितों को कानूनी पेचीदगियों से मुक्ति मिलेगी और उनका पैसा जल्द वापस मिल सकेगा।

GRM मॉड्यूल से अनफ्रीज होंगे बैंक खाते

इसके साथ ही कार्यशाला में Grievance Redressal Module के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। एएसपी ने बताया कि अक्सर जांच के दायरे में आने के कारण पीड़ितों या संदिग्धों के खातों पर होल्ड लग जाता है। इस मॉड्यूल के माध्यम से पीड़ित के बैंक खाते से ‘LEIN/HOLD’ हटाने तथा खाते को ‘Unfreeze’ कराने की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और प्रभावी रूप से संपादित किया जा सकता है, जिससे आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

‘म्यूल अकाउंट्स’ पर कड़ाई और जागरूकता के निर्देश

बैठक में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किराए के बैंक खाते की पहचान करने और इन पर कड़ाई से नकेल कसने के संबंध में बैंक अधिकारियों के साथ रणनीति साझा की गई। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों को संदिग्ध खातों पर पैनी नजर रखने को कहा गया।

अपर पुलिस अधीक्षक अपराध ने उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों और बैंक प्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे साइबर अपराधों की रोकथाम हेतु पूरी सतर्कता बरतें। साथ ही, आमजन को साइबर ठगी से बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए, ताकि लोग अपने पासवर्ड, ओटीपी और संवेदनशील वित्तीय डेटा किसी से साझा न करें।