डिबाई: वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के महंत गीताराम गिरी बाबा का निधन; 41 दिन की ‘धूनी साधना’ के दौरान बिगड़ी थी तबीयत, संतों और भक्तों में शोक

डिबाई/राजघाट

बुलंदशहर जनपद में डिबाई क्षेत्र के राजघाट स्थित सुप्रसिद्ध प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य महंत गीताराम गिरी बाबा का शुक्रवार रात्रि लगभग 9:15 बजे आकस्मिक निधन हो गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद में डिबाई क्षेत्र के राजघाट स्थित सुप्रसिद्ध प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य महंत गीताराम गिरी बाबा का शुक्रवार रात्रि लगभग 9:15 बजे आकस्मिक निधन हो गया। लगभग 75 वर्ष की आयु में उनके ब्रह्मलीन होने की खबर फैलते ही संपूर्ण क्षेत्र सहित दूर-दराज के श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। बाबा के अंतिम दर्शनों के लिए देर रात से ही मंदिर परिसर में भक्तों और संत समाज का भारी सैलाब उमड़ पड़ा।

41 दिन की कठिन धूनी साधना के संकल्प पर थे बाबा

राजघाट निवासी गोपाल पंडित ने जानकारी देते हुए बताया कि महंत गीताराम गिरी बाबा पिछले कई दिनों से अत्यंत कठिन तपस्या और धूनी समाधि में लीन थे। बाबा ने 41 दिनों की कठिन धूनी साधना का कड़ा संकल्प लिया था, जिसके अंतर्गत वे लगातार 11 दिनों तक भीषण व कठोर तपस्या में बैठे रहे। इसी कठोर साधना के दौरान अचानक उनका स्वास्थ्य अत्यधिक बिगड़ गया था। तबीयत खराब होने के बाद उनके स्थान पर उनके शिष्यों ने पूजा-अर्चना और साधना की आगे की व्यवस्था संभाली थी, लेकिन शुक्रवार रात बाबा पंचतत्व में विलीन हो गए।

सरल स्वभाव और आध्यात्मिक तपस्या के लिए थी विशेष पहचान

महंत गीताराम गिरी बाबा आध्यात्मिक और धार्मिक जगत की एक प्रतिष्ठित विभूति थे। वे अपने अत्यंत सरल स्वभाव, कठोर तपस्या, वैराग्य और भक्तों के प्रति अगाध समर्पण के लिए पूरे बुलंदशहर जनपद और आसपास के जिलों में एक विशेष पहचान रखते थे। उनके सानिध्य में वनखंडेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में सनातन धर्म और सेवा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा।

धार्मिक जगत की अपूरणीय क्षति; उमड़ी भारी भीड़

बाबा के गोलोकवासी होने से स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और संत समाज में गहरा दुख व्याप्त है। मंदिर परिसर में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने और बाबा के अंतिम दर्शन करने के लिए हजारों नम आंखों का तांता लगा हुआ है। संत समाज और भक्तों ने उनके महाप्रयाण को धार्मिक और आध्यात्मिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। शनिवार दोपहर को पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका अंतिम संस्कार/भू-समाधि की प्रक्रिया संपन्न किए जाने की संभावना है।

 

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