खाकी का मानवीय चेहरा: सिकंदराबाद CO ने पेश की इंसानियत की मिसाल,घायलों को अपनी गाड़ी से पहुँचाया अस्पताल, बचाई दो जानें

सिकंदराबाद

बुलंदशहर जनपद ‘खाकी’ अक्सर अपने सख्त अनुशासन के लिए जानी जाती है, लेकिन बुलंदशहर के सिकंदराबाद में तैनात सर्किल ऑफिसर (CO) भास्कर कुमार मिश्रा ने अपनी तत्परता से यह साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील इंसान भी बसता है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद ‘खाकी’ अक्सर अपने सख्त अनुशासन के लिए जानी जाती है, लेकिन बुलंदशहर के सिकंदराबाद में तैनात सर्किल ऑफिसर (CO) भास्कर कुमार मिश्रा ने अपनी तत्परता से यह साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील इंसान भी बसता है। ड्यूटी से लौटते समय सड़क किनारे पड़े घायलों को देख सीओ साहब ने बिना समय गंवाए उन्हें अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुँचाकर मानवता की नई मिसाल पेश की है।

जाट चौक पर भीड़ देख रुकवाया काफिला

जानकारी के अनुसार, सीओ भास्कर कुमार मिश्रा बुलंदशहर कोर्ट से शासकीय कार्य निपटाकर वापस दफ्तर लौट रहे थे। जैसे ही उनका वाहन जाट चौक के पास पहुँचा, उन्होंने नेशनल हाईवे के किनारे भारी भीड़ जमा देखी। अनहोनी की आशंका होते ही उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और मौके पर पहुँच गए।

एम्बुलेंस का इंतज़ार करने के बजाय खुद संभाली कमान

मौके पर हापुड़ निवासी भाई-बहन सड़क किनारे अचेत और लहूलुहान अवस्था में पड़े थे। उनकी बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। सीओ साहब ने महसूस किया कि एम्बुलेंस को आने में समय लग सकता है और घायलों की स्थिति नाजुक है।

तत्काल कार्रवाई: उन्होंने बिना किसी झिझक के अपने साथ मौजूद सिपाहियों की मदद से दोनों घायलों को अपनी सरकारी बोलेरो में बैठाया।

समय पर उपचार: वह खुद घायलों को लेकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचे और उन्हें डॉक्टरों की देखरेख में भर्ती कराया।

ड्यूटी से बढ़कर निभाई इंसानियत

पुलिस अधिकारी की इस सूझबूझ और फुर्ती के कारण हापुड़ निवासी तन्नू और उसके भाई को समय पर डॉक्टरी सहायता मिल सकी। चश्मदीदों और अस्पताल के स्टाफ ने सीओ भास्कर कुमार मिश्रा की इस पहल की जमकर सराहना की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी ने एम्बुलेंस का इंतज़ार किया होता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।

 

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