लखीमपुर-खीरी: नोएडा के श्रमिकों के दमन के खिलाफ गूंजी आवाज; समाजवादी मजदूर सभा ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

लखीमपुर-खीरी

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के कथित शोषण और प्रशासन द्वारा की जा रही दमनकारी कार्रवाई के विरोध में आज समाजवादी मजदूर सभा (उ.प्र.) एवं अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के कथित शोषण और प्रशासन द्वारा की जा रही दमनकारी कार्रवाई के विरोध में आज समाजवादी मजदूर सभा (उ.प्र.) एवं अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन के सदस्यों ने महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक पांच सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी लखीमपुर-खीरी के माध्यम से सौंपा।

दमनकारी कार्रवाई पर जताई चिंता

ज्ञापन के माध्यम से पदाधिकारियों ने नोएडा में अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे घरेलू और औद्योगिक श्रमिकों के प्रति एकजुटता प्रकट की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए प्रशासन द्वारा रासुका (NSA) जैसी कठोर धाराओं का दुरुपयोग किया जा रहा है और निर्दोष कार्यकर्ताओं व पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है।

संगठन की प्रमुख मांगें

समाजवादी मजदूर सभा ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

न्यूनतम वेतन: बढ़ती महंगाई को देखते हुए अकुशल मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रतिमाह तय किया जाए।

कैदियों की रिहाई: आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी मजदूरों और पत्रकारों को बिना शर्त रिहा किया जाए तथा उन पर लगी कठोर धाराएं हटाई जाएं।

न्यायिक जांच: 13-14 अप्रैल को हुई हिंसा की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और दोषी अधिकारियों व प्रबंधन पर मुकदमा दर्ज किया जाए।

लेबर कोड की वापसी: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चारों नए लेबर कोड रद्द हों और ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।

मनरेगा कर्मियों का भुगतान: आंदोलनरत मनरेगा कर्मियों के बकाया वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

 

ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से शौर्य वर्धन गुप्ता, इसरार अहमद, हरजीत सिंह, यदुवेंद्र वर्मा, अनुपम पटेल, दिव्यांशु यादव, अजय सिंह और सोहेल ख़ान सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन जिला स्तर से बढ़कर पूरे प्रदेश में और उग्र रूप धारण करेगा।

 

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